इलाहबाद हाई कोर्ट से यूपी शिक्षामित्रों को झटका लगा है। कोर्ट ने शिक्षामित्रों को स्पेशल TET में शामिल करने वाली मांग याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता केवल इसलिए स्पेशल TET परीक्षा में शामिल होने का दावा नहीं कर सकते कि वो सामान्य TET में बैठने के लिए योग्य हैं। स्पेशल टीईटी में शामिल होने की मांग को लेकर कोर्ट में वसीम अहमद समेत 220 अन्य लोगों ने याचिका दाखिल की थी।
जानकारी के लिए बता दें कि यूपी के शिक्षा मित्र लगातार नौकरी पक्की करने की मांग को लेकर अड़े हुए हैं, जिसे लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन भी हुए, लेकिन जैसे ही स्पेशल TET परीक्षा कराने का ऐलान हुआ। वैसे ही शिक्षा मित्रों ने मांग की कि उन्हें भी इस पात्रता परीक्षा में शामिल किए जाए, जिसकी मांग को आज इलाहबाद हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया।
स्पेशल TET परीक्षा आखिर क्या है?
अगर हम स्पेशल TET परीक्षा की बात करें, तो सबसे पहले इसकी फुल फॉर्म के बारे में जान ले जाना चाहिए, जिसकी फुल फॉर्म होती है स्पेशल शिक्षक पात्रता परीक्षा। यह परीक्षा दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की पात्रता निर्धारित करने के लिए आयोजित की जाती है। इस परीक्षा को पास करने के बाद उम्मीदवार स्कूलों में दृष्टिबाधित, मूक-बधिर, मानसिक रूप से दिव्यांग या अन्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ा सकते हैं।
स्पेशल TET के लिए उम्मीदवार के पास बीएड (स्पेशल एजुकेशन) या डीएड (स्पेशल एजुकेशन) की डिग्री/डिप्लोमा के साथ भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान से विशेष शिक्षा में ट्रेनिंग या डिग्री होना अनिवार्य होता है।
अब आगे की राह क्या होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने TET परीक्षा अब यूपी के सभी टीचर्स के लिए अनिवार्य कर दी। हालांकि इनमें वे टीचर्स भी शामिल होंगे, जो टीचर्स के पद पर कार्यरत है। इन सभी शिक्षकों को एक साल के भीतर TET परीक्षा पास करनी होगी। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो सभी कार्यरत टीचर्स को पद से निष्कासित कर दिया जाएगा या नौकरी से निकाल दिया जाएगा।
