भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें यहां कई बड़ी-बड़ी रियासतें देखने को मिलती हैं। इन रियासतों का शासन बड़े-बड़े किलों से होता था। इस कड़ी में यहां एक कई किले ऐसे हुए हैं, जिन्हें उनकी वास्तुकला के लिए अलग-अलग नामों से जाना गया है। ऐसे में यहां एक किला ऐसा भी है, जिसे ‘चील का घोंसला’ भी कहा जाता है। कौन-सा है यह किला, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
किस किले को कहते हैं ‘चील का घोंसला’
भारत में कई ऐतिहासिक और मजबूत किले हैं, लेकिन राजस्थान के जयपुर में स्थित जयगढ़ किला अपनी एक अलग और रहस्यमयी पहचान रखता है। इसी किले को "चील का घोंसला" कहा जाता है।
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क्यों कहा जाता है ‘चील का घोंसला’
यह किला अरावली पर्वतमाला की जिस ऊंची चोटी पर स्थित है, उसे ऐतिहासिक रूप से 'चील का टीला' यानी 'Hill of Eagles' कहा जाता था। इसी पहाड़ी के नाम पर इस किले को ‘चील का घोंसला’ उपनाम मिला। ऊंचाई पर होने के कारण यहां से पूरे जयपुर शहर, मान सागर झील और नीचे स्थित आमेर किले का बिल्कुल साफ नजारा दिखाई देता है। इसकी भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां से दुश्मन की हर हरकत पर ऊंचाई से ठीक वैसे ही नजर रखी जा सकती थी, जैसे कोई चील आसमान से अपने शिकार पर नजर रखती है।
क्या है किले का इतिहास
जयगढ़ किले का निर्माण 1726 ईस्वी में महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने करवाया था। यह कोई सामान्य आवासीय महल नहीं था, बल्कि इसे पूरी तरह से एक सैन्य ढांचे के रूप में बनाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य नीचे स्थित आमेर किले और शाही परिवार की सुरक्षा करना था। इस किले में राजपुताना सेना के प्रमुख हथियार, तोपें और भारी गोला-बारूद बनाए और सुरक्षित रखे जाते थे। इसे राजस्थान के सबसे मजबूत किलों में गिना जाता है, क्योंकि अपनी मजबूत बनावट के कारण यह हमेशा अजेय रहा। इसे कभी कोई बाहरी आक्रमणकारी जीत नहीं सका।
किले की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं
-इस किले का सबसे बड़ा आकर्षण 'जयवाण तोप' है, जिसे पहियों पर रखी दुनिया की सबसे बड़ी ऐतिहासिक तोप माना जाता है। कहा जाता है कि इसे इतिहास में केवल एक बार परीक्षण के लिए चलाया गया था। इसके गोले की आवाज इतनी तेज थी और वह इतनी दूर जाकर गिरा था कि वहां एक बड़ा तालाब बन गया था।
-जयगढ़ किला अपने कछवाहा राजवंश के गुप्त खजाने की कहानियों के लिए पूरे भारत में मशहूर है। आपातकाल के दौरान 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्देश पर भारतीय सेना ने इस किले में खजाने की खोज के लिए महीनों तक खुदाई की थी। हालांकि, सरकार ने आधिकारिक तौर पर कहा कि वहां कोई खजाना नहीं मिला, लेकिन यह आज भी आधुनिक भारतीय इतिहास के सबसे बड़े रहस्यों में से एक माना जाता है।
-इस किले की इंजीनियरिंग अपने समय से बहुत आगे थी। पहाड़ी के ढलान से बारिश का पानी पक्की नहरों के जरिए किले के तीन बड़े भूमिगत टैंकों में जमा होता था। सबसे बड़े टैंक में लाखों गैलन पानी जमा हो सकता था, जो सेना के लिए सालों तक पर्याप्त रहता था।
