भारत में कुल 28 राज्य हैं। इन सभी राज्यों की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। कुछ राज्यों को उनकी अनूठी विशेषताओं की वजह से उनके मूल नाम के अलावा उन्हें उपनाम से भी जाना जाता है। आपने ऐसे अलग-अलग राज्यों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। इस कड़ी में क्या आप जानते हैं कि देश का वह इकलौता राज्य कौन-सा है, जिसे 'ईश्वर का अपना देश' भी कहा जाता है? यदि आप नहीं जानते हैं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
किस देश को कहते हैं 'ईश्वर का अपना देश'
भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित केरल को पूरी दुनिया में 'ईश्वर का अपना देश' (God's Own Country) कहा जाता है। यह उपाधि महज एक पर्यटन स्लोगन नहीं है, बल्कि केरल की प्राकृतिक सुंदरता, पौराणिक मान्यताओं, समृद्ध संस्कृति और सामाजिक कारण को देखते हुए यह नाम दिया गया है।
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केरल को क्यों कहते हैं 'ईश्वर का अपना देश'
केरल को 'ईश्वर का अपना देश' कहने के पीछे अलग-अलग कारण हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
-केरल की भौगोलिक बनावट इसे धरती पर स्वर्ग के समान बनाती है।
-इसके एक ओर अरब सागर की नीली लहरें हैं, तो दूसरी ओर पश्चिमी घाट की हरी-भरी पहाड़ियां हैं। यहां के मुन्नार और वायनाड के धुंध से ढके चाय के बागान, शांत झीलें, ऊंचे-ऊंचे नारियल के पेड़ और दुनिया भर में मशहूर 'बैकवाटर्स' का बड़ा नेटवर्क है।
-केरल को आयुर्वेद का घर भी कहा जाता है। यहां की विशेष समशीतोष्ण जलवायु और पश्चिमी घाट के जंगलों में मिलने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियां इसे आयुर्वेद के लिए दुनिया का सबसे अनुकूल स्थान बनाती हैं। सदियों से यहां के लोग प्राकृतिक तरीके से इंसान के शरीर को स्वस्थ रखने का काम कर रहे हैं, जिसे प्रकृति और ईश्वर का सीधा वरदान माना जाता है।
-केरल का समाज 'अनेकता में एकता' का उदाहरण है। यह वह भूमि है, जहां हिंदू, मुस्लिम और ईसाई धर्म सदियों से शांति और प्रेम के साथ रहे हैं। आपको यहां प्राचीन मंदिर, ऐतिहासिक मस्जिदें और चर्च एक ही गली में मिल जाएंगे। धर्मों के बीच यह शांतिपूर्ण माहौल इसे सही मायनों में 'ईश्वर का घर' बनाता है।
पर्यटन विभाग का ऐतिहासिक अभियान
आधिकारिक तौर पर 1980 के दशक में केरल पर्यटन विभाग ने राज्य को एक वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने के लिए ‘God's Own Country’ का नारा गढ़ा था। यह अभियान इतना सफल और प्रामाणिक साबित हुआ कि आज यह नाम केरल की स्थायी पहचान बन चुका है।
