भारत को विविधताओं का देश कहा जाता है। यहां अलग-अलग जाति और समुदाय के लोग रहते हैं, जो कि अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में देखने को मिलते हैं। इस कड़ी में क्या आप जानते हैं कि भारत का सबसे बड़ा जनजातीय समूह कौन-सा है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
भारत का सबसे बड़ा जनजातीय समूह कौन-सा है
साल 2011 की जनगणना के अनुसार, 'भील' भारत का सबसे बड़ा जनजातीय समूह है। भारत की कुल अनुसूचित जनजाति (ST) आबादी में भीलों की हिस्सेदारी लगभग 38% है और इनकी कुल आबादी करीब 1.7 करोड़ दर्ज की गई थी। इसके बाद दूसरे स्थान पर 'गोंड' जनजाति आती है।
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क्या है भील जनजाति का इतिहास
'भील' शब्द की उत्पत्ति मूल रूप से द्रविड़ भाषा के शब्द 'बिल्लू' से मानी जाती है, जिसका अर्थ होता है 'धनुष'। भील समुदाय सदियों से धनुष-बाण बनाने और उसे चलाने में माहिर रहा है। ऐतिहासिक रूप से इन्हें बेहतरीन तीरंदाज माना जाता है और इसी कौशल के कारण इन्हें यह नाम मिला।
कहां से कहां तक हैं भील
भील जनजाति मुख्य रूप से पश्चिमी और मध्य भारत के एक बड़े भू-भाग में निवास करती है। इनका सबसे अधिक हिस्सा मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में पाया जाता है। विशेष रूप से मध्य प्रदेश के झाबुआ, अलीराजपुर, धार और बड़वानी जिलों और राजस्थान के बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों में भीलों की आबादी बहुत अधिक है। इनकी अपनी मातृभाषा 'भीली' है, जिसमें राजस्थानी, गुजराती और मराठी भाषाओं का प्रभाव देखने को मिलता है।
ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्त्व
भारतीय इतिहास में भील जनजाति का स्थान गौरवशाली रहा है। मेवाड़ (राजस्थान) के इतिहास में इनका विशेष उल्लेख मिलता है। महान योद्धा महाराणा प्रताप की सेना में भील योद्धाओं ने मुगलों के खिलाफ छापामार युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। राणा पूंजा भील ने हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप को मजबूत सैन्य समर्थन दिया था। इसी ऐतिहासिक वफादारी और वीरता के सम्मान में आज भी मेवाड़ के शाही राजचिह्न में एक तरफ राजपूत योद्धा और दूसरी तरफ धनुष लिए भील योद्धा को दर्शाया जाता है।
भीलों की संस्कृति और कला
भील अपनी पारंपरिक 'पिथौरा चित्रकला' के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। यह चित्रकला घर की दीवारों पर की जाती है और इसमें मुख्य रूप से घोड़ों, प्रकृति और देवी-देवताओं को उकेरा जाता है। राजस्थान का विश्व प्रसिद्ध 'घूमर' और पारंपरिक 'गवरी' नृत्य मूल रूप से भील जनजाति की ही देन है। मध्य प्रदेश में होली के अवसर पर लगने वाला 'भगोरिया हाट' भीलों का सबसे प्रसिद्ध त्योहार है। इसके अलावा, राजस्थान में माही और सोम नदियों के संगम पर लगने वाला 'बेणेश्वर मेला' भील जनजाति का महाकुंभ कहलाता है।
