भारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन कहा जाता है। प्रतिदिन करोड़ों यात्री विभिन्न रेलवे स्टेशनों से अपनी यात्रा शुरू करते हैं। आपने देश के अलग-अलग रेलवे स्टेशनों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में एकमात्र रेलवे स्टेशन ऐसा भी है, जिसे यूनेस्को की विश्व धरोहर का दर्जा मिला हुआ है। कौन-सा है यह रेलवे स्टेशन और किस शहर में है स्थित, जानने के लिए यह पूरा लेख पढ़ें।
किस रेलवे स्टेशन को मिला है UNESCO विश्व धरोहर का दर्जा
भारत का इकलौता यूनेस्का विश्व धरोहर यानि UNESCO World Heritage Site रेलवे स्टेशन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस(CSMT) है, जो मुंबई में स्थित है। पहले इसे विक्टोरिया टर्मिनस (VT) के नाम से जाना जाता था। यह स्टेशन न केवल भारतीय रेलवे की रीढ़ की हड्डी है, बल्कि गॉथिक वास्तुकला का एक विश्व प्रसिद्ध मास्टरपीस भी है। साल 2004 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।
कब हुआ था रेलवे स्टेशन का निर्माण
इस रेलवे स्टेशन की इमारत का निर्माण ब्रिटिश काल के दौरान 1878 में शुरू हुआ था और 1888 में यह बनकर तैयार हुई। इसे बनने में लगभग 10 साल का समय लगा था। उस समय महारानी विक्टोरिया के शासन के 50 साल पूरे होने के अवसर पर इसका नाम 'विक्टोरिया टर्मिनस' रखा गया था।
कब बदला रेलवे स्टेशन का नाम
साल 1996 में रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर महान मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर 'छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस' कर दिया गया।
वास्तुकला और डिजाइन के लिए जाना जाता है स्टेशन
CSMT की वास्तुकला का श्रेय ब्रिटिश वास्तुकार एफ. डब्ल्यू. स्टीवंसको जाता है। उन्होंने इसे Victorian Gothic Revival आर्किटेक्चर और पारंपरिक भारतीय वास्तुकला के अनूठे मेल से डिजाइन किया था। इसमें ऊंचे गुंबद, नुकीले मेहराब और पत्थर की नक्काशीदार आकृतियां गॉथिक शैली में हैं, जबकि इसमें लगे झरोखे, छोटी नक्काशीदार खिड़कियां और लकड़ी की बारीक जालियां भारतीय पारंपरिक शैली से प्रेरित हैं।
स्टेशन का सेंट्रल डोम है आकर्षण का केंद्र
स्टेशन की मुख्य इमारत के ऊपर बना बड़ा अष्टकोणीय गुंबद इसकी पहचान है। इसके टॉप पर एक महिला की कांस्य मूर्ति स्थापित है, जो हाथ में मशाल लिए 'प्रगति' का प्रतीक मानी जाती है। वहीं, प्रवेश द्वार के खंभों पर ब्रिटेन का प्रतीक शेर और भारत का प्रतीक बाघ की उकेरी गई आकृतियां दोनों संस्कृतियों के संगम को दर्शाती हैं। आपको बता दें कि यह मध्य रेलवे का मुख्यालय है और यहां से प्रतिदिन 30 लाख से अधिक यात्री आवाजाही करते हैं।
