भारत में कई किले अपने गौरवशाली इतिहास और अनूठी वास्तुकला के लिए जाने जाते हैं। आपने देश के अलग-अलग कई किलों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में एक किला ऐसा भी है, जिसे ‘सिंह की गुफा’ भी कहा जाता है। यह किला अपने समृद्ध इतिहास के लिए जाना जाता है। कौन-सा है यह किला, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
किस किले को कहते हैं ‘सिंह की गुफा’
महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नर कस्बे के पास स्थित शिवनेरी किले को मराठा इतिहास में गौरवशाली स्थान प्राप्त है। इसे अक्सर ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक रूप से ‘सिंह की मांद’ या ‘सिंह की गुफा’ कहा जाता है। यह उपाधि इस किले की अभेद्य भौगोलिक बनावट, सैन्य सुरक्षा और सबसे बढ़कर मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्मस्थल होने के कारण दी गई है।
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किले में हुआ था छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म
मराठा सिंह छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्मस्थान इस किले को 'सिंह की गुफा' कहे जाने का सबसे बड़ा ऐतिहासिक कारण यह है कि 19 फरवरी 1630 को यहीं 'हिंदवी स्वराज्य' के संस्थापक और मराठा इतिहास के महानायक छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म हुआ था। शिवाजी महाराज को उनकी वीरता, रणनीतिक कौशल और निर्भीकता के कारण अक्सर "सह्याद्रि का सिंह" कहा जाता है।
खड़ी पहाड़ी पर बना है किला
शिवनेरी किला किसी शेर की सुरक्षित गुफा की तरह ही है। यह किला लगभग 300 मीटर ऊंची एक बड़ी और खड़ी पहाड़ी पर स्थित है। इसके चारों ओर की ढलानें बिल्कुल सीधी और चट्टानी हैं, जिस पर दुश्मन का चढ़ना लगभग असंभव था। किले के प्राकृतिक पत्थरों को तराशकर ऐसी संरचना बनाई गई थी, जो किसी भी बाहरी आक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित आश्रय प्रदान करती थी।
सात फाटकों वाली सुरक्षा व्यवस्था
जिस तरह शेर की मांद तक पहुंचना असंभव माना जाता है, उसी प्रकार शिवनेरी किले के मुख्य भाग तक पहुंचना किसी भी सेना के लिए बहुत कठिन था। इस किले में प्रवेश के लिए सात बड़े दरवाजों को पार करना पड़ता था। इनमें महादरवाजा, पीर दरवाजा, परवान दरवाजा, हाथी दरवाजा, शिपाई दरवाजा, फाटक दरवाजा और कुलंबकर दरवाजा है। इन दरवाजों की रक्षात्मक बनावट ऐसी थी कि कोई भी शत्रु दल आसानी से अंदर प्रवेश नहीं कर सकता था।
