क्या होती है Greenwashing और इससे कैसे बचें, जानें यहां

आपने अलग-अलग वॉशिंग के बारे में पढ़ा और सुना होगा। इसमें से एक ग्रीन वॉशिंग है, जिसके तहत कंपनियों द्वारा बड़े-बड़े वादे किये जाते हैं, लेकिन ये वादें सच्चाई से इतर होते हैं। इस लेख में हम ग्रीनवॉशिंग के बारे में विस्तार से जानेंगे।

May 29, 2026, 18:09 IST
ग्रीनवॉशिंग
ग्रीनवॉशिंग

दुनिया में बढ़ती पर्यावरण समस्या की वजह से ग्रीनवॉशिंग जैसे शब्दों का प्रयोग बढ़ गया है। बीते वर्षों में UPSC ने भी इससे जुड़े सवाल पूछे हैं। दरअसल, यह एक भ्रामक मार्केटिंग रणनीति होती है, जिसमें कंपनियां खुद को इको-फ्रेंडली बताकर ग्राहकों के साथ धोखा करती हैं। वास्तव में उनकी कंपनियां पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही होती हैं। इस लेख में हम ग्रीनवॉशिंग के बारे में विस्तार से जानेंगे।

कंपनियां किस प्रकार करती हैं ग्रीनवॉशिंग?

अब हम यह जान लेते हैं कि आखिर कंपनियों द्वारा किस प्रकार ग्रीनवॉशिंग की जाती है। 

-कंपनियों द्वारा उत्पाद के पैकेट पर 100 फीसदी नेचुरल, इको-फ्रेंडली, ग्रीन या फिर बायोडिग्रेडेबल लिखा जाता है, जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता है।

-कई बार कंपनियों द्वारा उत्पादों की पैकेजिंग जानबूझकर हरे रंग में की जाती है। इस पर पेड़ या पृथ्वी के चित्र बनाए जाते हैं, जिससे ग्राहकों को यह लगे कि उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल है।

-कुछ कंपनियां यह दावा करती हैं कि उनके द्वारा बनाया गया कप पुनर्चक्रण के लिए योग्य है, लेकिन इसके लिए कंपनियों ने कई पेड़ काटे होते हैं। 

-यदि कोई कंपनी अपने उत्पाद पर ऐसे लोगो बनवा दे, जो कि किसी सरकारी या मान्यता प्राप्त पर्यावरण संस्था जैसा दिखे, तब भी यह ग्रीनवॉशिंग कहलाएगा।

-पानी बेचने वाली कंपनियां अपनी बोतलों पर पानी और नदियों के चित्र बनाती हैं और बोतलों को 100 फीसदी रीसाइकिलेबल लिखती है, जबकि ऐसा होता नहीं है।

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इससे क्या नुकसान है?

-ऐसी कंपनियां, जो कि रुपये खर्च अपने उत्पादों को पर्यावरण के अनुकूल बना रही हैं, वे झूठी कंपनियों के दावे के आगे टिक नहीं पाती हैं।
-कई बार ग्राहक पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को भी फर्जी समझते हैं और इससे कंपनियों को नुकसान होता है।

-ग्राहक पर्यावरण के अनुकूल समझकर उत्पाद खरीद लेते हैं, लेकिन वास्तव में इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं।

ग्रीनवॉशिंग से कैसे बचा जा सकता है

-कंपनियां द्वारा लिखे गए नेचुरल पर ध्यान न दें, बल्कि उत्पाद के पीछे सामाग्री और वैज्ञानिक प्रमाणों को भी पढ़ें।

-यह देखें कि क्या कंपनी को जांच में स्वतंत्र वैश्विक संस्था जैसे FSC, Energy Star, या USDA Organic से सर्टिफिकेट मिला है।

-यदि किसी कंपनी द्वारा यह दावा किया गया है कि फलां उत्पाद प्रदूषण मुक्त है, तो यह भ्रामक हो सकता है। क्योंकि, इस तरह की संभावना बहुत ही कम होती है।

क्यों जरूरी है यह लेख

बीते वर्षों में यूपीएससी द्वारा ग्रीनवॉशिंग से जुड़े सवाल पूछे गए हैं। इसके अलावा राज्य स्तर की परीक्षाओं में भी इससे जुड़े सवाल आ जाते हैं। ऐसे में इस लेख में ग्रीनवॉशिंग के बारे में विस्तार से बताया गया है।


Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

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