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भारतीय संविधान की विशेषताएं

Last Updated: Dec 22, 2015, 10:17 IST

संविधान, किसी भी देश का मौलिक कानून है जो सरकार के विभिन्न अंगों की रूपरेखा और मुख्य कार्य का निर्धारण करता है। साथ ही यह सरकार और देश के नागरिकों के बीच संबंध भी स्थापित करता है। वर्तमान में, भारत का संविधान 465 अनुच्छेद जो 25 भागों और 12 अनुसूचियों में लिखित है। हालांकि, संविधान की कई विशेषताएं हैं जैसे धर्मनिरपेक्ष राज्य, संघवाद, संसदीय सरकार इत्यादि ।

भारतीय संविधान की विशेषताएं
भारतीय संविधान की विशेषताएं

संविधान, किसी भी देश का मौलिक कानून है जो सरकार के विभिन्न अंगों की रूपरेखा और मुख्य कार्य का निर्धारण करता है। साथ ही यह सरकार और देश के नागरिकों के बीच संबंध भी स्थापित करता है। वर्तमान में, भारत का संविधान 465 अनुच्छेद जो 25 भागों और 12 अनुसूचियों में लिखित है। हालांकि, संविधान की कई विशेषताएं हैं जैसे धर्मनिरपेक्ष राज्य, संघवाद, संसदीय सरकार इत्यादि ।

भारत का संविधान

संविधान विशेष कानूनी शुचिता वाले लोगों के विश्वास और आकांक्षाओं का दस्तावेज है। देश के बाकी सभी कानून और रीति– रिवाजों को वैध होने के लिए इसका पालन करना होगा। भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था जिसमें 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचि और 22 हिस्से थे। यह दुनिया का सबसे विस्तृत लिखित संविधान है। वर्तमान में, भारत का संविधान 465 अनुच्छेद जो 25 भागों और 12 अनुसूचियों में लिखित है। समय– समय पर संविधान में कई संशोधन किए गए हैं। जैसे, 42 वें संशोधन अधिनियम,1976 द्वारा कई बदलाव किए गए।

भारतीय संविधान के स्रोतः

विभिन्न देशों के संविधान से उधार ली गईं विशेषताएं इस प्रकार हैं–

ब्रिटेन से

  • नाममात्र का प्रमुख– राष्ट्रपति ( जैसे ब्रिटेन की महारानी )
  • मंत्रियों की कैबिनेट प्रणाली
  • प्रधानमंत्री का पद
  • सरकार का संसदीय प्रकार
  • दो सदन वाली संसद
  • अधिक शक्तिशाली निचला सदन
  • मंत्रि परिषद का निचले सदन के प्रति जिम्मेदार होना
  • लोकसभा में अध्यक्ष

अमेरिका से

  • लिखित संविधान
  • देश का कार्यकारी प्रमुख जिसे राष्ट्रपति कहा जाता है और वह सैन्य बलों का सर्वोच्च कमांडर होगा
  • राज्य सभा के पदेन अध्यक्ष के तौर पर उप–राष्ट्रपति
  • मौलिक अधिकार
  • सुप्रीम कोर्ट
  • राज्यों का प्रावधान
  • न्यायपालिका और न्यायिक समीक्षा की स्वतंत्रता
  • प्रस्तावना
  • सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के जजों को हटाना

यूएसएसआर से

  • मौलिक कर्तव्य
  • पंचवर्षीय योजना

ऑस्ट्रेलिया से

  • समवर्ती सूची
  • प्रस्तावना की भाषा
  • व्यापार, वाणिज्य और मेल–जोल के संदर्भ में प्रावधान

जापान से

  • कानून जिस पर सुप्रीम कोर्ट काम करता है

जर्मनी के संविधान से 

  • आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों का निलंबन

कनाडा से

  • सशक्त केंद्र के साथ संघ की योजना
  • केंद्र और राज्यों एवं स्थानों के बीच सत्ता का वितरण। केंद्र के पास बाकी के अधिकार

आयरलैंड से

  • राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों की अवधारणा (आयरलैंड ने इसे स्पेन से उधार लिया था)
  • राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति
  • राष्ट्रपति द्वारा राज्य सभा में सदस्यों का नामांकन

संविधान की मुख्य विशेषताएं

संघ और राज्यों दोनों के लिए एक ही संविधान– भारत में संघ और राज्य दोनों ही के लिए एक ही संविधान है। संविधान एकता और राष्ट्रवाद के आदर्शों के सम्मिलन को बढ़ावा देता है। एकल संविधान सिर्फ भारत की संसद को संविधान में बदलाव करने की शक्ति प्रदान करता है। यह संसद को नए राज्य के गठन या मौजूदा राज्य को समाप्त करने या उसकी सीमा में बदलाव करने की शक्ति प्रदान करता है।

संविधान के स्रोत भारतीय संविधान ने विभिन्न देशों से प्रावधान उधार लिए हैं और देश की उपयुक्तता और जरुरतों के लिहाज से उसमें संशोधन किया है। भारत के संविधान का संरचनात्मक भाग भारत सरकार अधिनियम, 1935 से लिया गया है। सरकार की संसदीय प्रणाली और कानून के नियम जैसे प्रावधान यूनाइटेड किंग्डम से लिए गए हैं।

कठोरता और लचीलापन भारत का संविधान न तो कठोर है और न ही लचीला। कठोर संविधान का अर्थ है कि संशोधन के लिए विशेष प्रक्रियाओं की जरूरत होती है जबकि लचीला संविधान वह होता है जिसमें संशोधन आसानी से किया जा सकता है।

धर्मनिरपेक्ष देश धर्मनिरपेक्ष देश शब्द का अर्थ है कि भारत में मौजूद सभी धर्मों को देशमें समान संरक्षण और समर्थन मिलेगा। इसके अलावा, सरकार सभी धर्मों के साथ एक जैसा व्यवहार करेगी और उन्हें एक समान अवसर उपलब्ध कराएगी।

भारत में संघवाद भारत के संविधान में संघ/ केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सत्ता के बंटवारे का प्रावधान है। यह संघवाद के अन्य विशेषताओं जैसे संविधान की कठोरता, लिखित संविधान, दो सदनों वाली विधायिका, स्वतंत्र न्यायपालिका और संविधान के वर्चस्व, को भी पूरा करता है। इसलिए भारत एकात्मक पूर्वाग्रह वाला एक संघीय राष्ट्र है।

सरकार का संसदीय स्वरूप भारत में सरकार का संसदीय स्वरूप है। भारत में दो सदनों – लोकसभा और राज्य सभा, वाली विधायिका है। सरकार के संसदीय स्वरूप में, विधायी और कार्यकारिणी अंगों की शक्तियों में कोई स्पष्ट अंतर नहीं है। भारत में, सरकार का मुखिया प्रधानमंत्री होता है।

एकल नागरिकता भारत का संविधान देश के प्रत्येक व्यक्ति को एकल नागरिकता प्रदान करता है। भारत में कोई भी राज्य किसी अन्य राज्य के वासी होने के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता। इसके अलावा, भारत में, किसी भी व्यक्ति को देश के किसी भी हिस्से में जाने और कुछ स्थानों को छोड़कर भारत की सीमा के भीतर कहीं भी रहने का अधिकार है।

एकीकृत और स्वतंत्र न्यापालिका भारत का संविधान एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका प्रणाली प्रदान करता है। सुप्रीम कोर्ट भारत का सर्वोच्च न्यायालय है। इसे भारत के सभी न्यायालयों पर अधिकार प्राप्त है। इसके बाद उच्च न्यायालय, जिला अदालत और निचली अदालत का स्थान है। किसी भी प्रकार के प्रभाव से न्यायपालिका की रक्षा के लिए संविधान में कुछ प्रावधान बनाए गए हैं जैसे कि जजों के लिए कार्यकाल की सुरक्षा और सेवा की निर्धारित शर्तें आदि।

राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत  संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36 से 50) में राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों के बारे में बात की गई है। इन्हें कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती हैं जो कि मोटे तौर पर समाजवादी, गांधीवादी और उदार– बौद्धिकता में वर्गीकृत हैं।

मौलिक कर्तव्य इन्हें 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) द्वारा संविधान में शामिल किया गया है। इस उद्देश्य के लिए, एक नया हिस्सा, भाग IV– ए बनाया गया और अनुच्छेद 51– ए के तहत दस कर्तव्य शामिल किए गए। यह प्रावधान नागरिकों को इस बात की याद दिलाता है कि अधिकारों का उपयोग करने के दौरान उन्हें अपने कर्तव्यों का भी निर्वहन करना चाहिए।

सार्वभौम व्यस्क मताधिकार भारत में,18 वर्ष से अधिक उम्र के प्रत्येक नागरिक को जाति, धर्म, वंश, लिंग, साक्षरता आदि के आधार पर भेदभाव किए बिना मतदान देने का अधिकार प्राप्त है। सार्वभौम व्यस्क मताधिकार सामाजिक असमानताओं को दूर करता है और सभी नागरिकों के लिए राजनीतिक समानता के सिद्धांत को बनाए रखता है।

आपातकाल के प्रावधानदेश की संप्रभुता, सुरक्षा, एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए किसी भी असाधारण स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रपति को कुछ खास कदम उठाने का अधिकार है। आपातकाल लगा दिए जाने के बाद राज्य पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन हो जाते हैं। जरुरत के अनुसार आपातकाल देश के कुछ हिस्सों या पूरे देश में लगाया जा सकता है।

इस प्रकार भारत का संविधान सबसे निचले स्तर या जमीनी स्तर पर लोकतंत्र, मौलिक अधिकारों और सत्ता के विकेंद्रीकरण के रूप में खड़ा है। इन शक्तियों और अधिकारों के कमजोर पड़ने की किसी भी संभावना को देखते हुए, संविधान के संरक्षक के रूप में काम करने, संविधान का उल्लंघन करने वाले किसी भी कानून या कार्यकारी अधिनियम को रद्द करने और इस प्रकार संविधान की सर्वोच्चता लागू करने के लिए, सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गई।

Hemant Singh is an academic writer with 7+ years of experience in research, teaching and content creation for competitive exams. He is a postgraduate in International
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First Published: Dec 22, 2015, 10:17 IST

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