This is an archived article last updated on May 15, 2017. The information may be outdated.

चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा क्या है और भारत इसका विरोध क्यों कर रहा है

Last Updated: May 15, 2017, 17:34 IST

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) पाकिस्तान के ग्वादर से लेकर चीन के शिनजियांग प्रांत के काशगर तक लगभग 2442 किलोमीटर लम्बी एक वाणिज्यिक परियोजना है l इस परियोजना की लागत 46 अरब डॉलर आंकी जा रही है l इस परियोजना का प्रमुख उद्येश्य रेलवे और हाइवे के माध्यम से तेल और गैस का कम समय में वितरण करना है।

चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा क्या है और भारत इसका विरोध क्यों कर रहा है
चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा क्या है और भारत इसका विरोध क्यों कर रहा है

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) पाकिस्तान के ग्वादर से लेकर चीन के शिनजियांग प्रांत के काशगर तक लगभग 2442 किलोमीटर लम्बी एक वाणिज्यिक परियोजना है l इस परियोजना की लागत 46 अरब डॉलर आंकी जा रही है l

Nawaj-XI-meeting

Image source:AFEIAS.com

चीन इस परियोजना के लिए पाकिस्तान में इतनी बड़ी मात्रा में पैसा निवेश कर रहा है कि वो साल 2008 से पाकिस्तान में होने वाले सभी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के दोगुने से भी ज़्यादा हैl चीन का यह निवेश साल 2002 से अब तक पाकिस्तान को अमरीका से मिली कुल आर्थिक सहायता से भी ज़्यादा हैl

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पाकिस्तान में रोज़गार के अवसरों में वृद्धि होगी और पिछले तीन दशकों से ख़राब हालत में चल रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को संजीवनी देने का काम करेगा l इस महत्वाकांक्षी परियोजना को चीन द्वारा "वन बेल्ट एंड वन रोड" या नई सिल्क रोड परियोजना भी कहा जाता है l नवम्बर 2016 में शुरू हुई इस परियोजना के तहत चार लेन के वाहन मार्ग की आधारशिला रखी गई है।

 China-pakistan-economic-corridor-route-map

Image source:आज तक

इस परियोजना के क्या उद्येश्य हैं?

इस परियोजना का प्रमुख उद्येश्य रेलवे और हाइवे के माध्यम से तेल और गैस का कम समय में वितरण करना है। इस परियोजना में - सड़कों, रेलवे, पाइपलाइनों, जल विद्युत संयंत्रों, ग्वादर बंदरगाह का विकास और अन्य विकास परियोजनाओं का विकास किया जायेगाl सूचनाओं के अनुसार ग्वादर बंदरगाह को इस तरह से विकसित किया जा रहा है, ताकि पाकिस्तान 19 मिलियन टन कच्चे तेल को चीन तक सीधे भेजने में सक्षम होगा।

 gwadar-port

Image source:Quora

भारत विरोध क्यों कर रहा है?

भारत द्वारा इसका विरोध इस कारण किया जा रहा है क्योंकि यह गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के विवादित क्षेत्र बलूचिस्तान से होते हुए जायेगा। यातायात और ऊर्जा का मिला-जुला यह प्रोजेक्ट समंदर में बंदरगाह को विकसित करेगा जो भारतीय हिंद महासागर तक चीन की पहुंच का रास्ता खोल देगाl

POK-MAP

Image source:The Tribune

ग्वादर, बलूचिस्तान के अरब सागर तट पर स्थित हैl  पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिम का यह हिस्सा दशकों से अलगाववादी विद्रोह का शिकार है, जबकि काशगर चीन के मुस्लिम बहुल इलाक़े शिनजियांग में स्थित हैl आर्थिक गलियारा उन इलाक़ों से होकर गुज़रेगा जो पाकिस्तान तालिबान लड़ाकों के हमले की ज़द में आते हैंl इसी माहौल के कारण भारत को इस बात का डर भी है कि इस परियोजना के कारण भारत के आस पास के क्षेत्र में अशांति फैलने का डर बना रहेगा l

13 ऐसे रहस्य जिसे चीन ने विश्व से छिपा रखा है

चीन को इस परियोजना से क्या फायदा होगा?

1. चीनियों के लिए यह रिश्ता रणनीतिक महत्व का हैl  यह गलियारा चीन को मध्यपूर्व और अफ़्रीका तक पहुंचने का सबसे छोटा रास्ता मुहैया कराएगा, जहां हज़ारों चीनी कंपनियां कारोबार कर रही हैंl

इस परियोजना से शिनजिंयाग को भी कनेक्टिविटी मिलेगी और सरकारी एवं निजी कंपनियों को रास्ते में आने वाले पिछड़े इलाकों में अपनी आर्थिक गतिविधियां चलाने का मौका मिलेगा, जिससे रोज़गार के अवसर पैदा होंगेl

2. अमेरिका द्वारा पाकिस्तान पर शिकंजा कसते हुए उसकी आर्थिक सहायता में कमी कर दी गयी है l दूसरी ओर भारत की अमेरिका से बढती नजदीकी के बीच चीन पाकिस्तान के साथ अपने रिश्ते और भी मीठे करने में लगा है l चीन, पाकिस्तान के विकास को बढ़ावा देकर भारत पर दबाव बढ़ाना चाहता है l

3. वर्तमान में मध्यपूर्व, अफ़्रीका और यूरोप तक पहुंचने के लिए चीन के पास एकमात्र व्यावसायिक रास्ता मलक्का जलडमरू है; यह लंबा होने के आलावा युद्ध के समय बंद भी हो सकता हैl

 strait-of-molacca

Image source:google

4. चीन एक पूर्वी गलियारे के बारे में भी कोशिश कर रहा है जो म्यांमार, बांग्लादेश और संभवतः भारत से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक जाएगाl

पाकिस्तान को क्या फायदा होगा

1. रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

2. आधारभूत संरचना का विकास बढेगा

3. अमेरिका द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता पर निर्भरता कम होगी

4. पाकिस्तान के चीन के मधुर रिश्ते होने के कारण भारत पर दबाव बनाने का प्रयास किया जायेगा

5. अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी 

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा चीन और पाकिस्तान के बीच आर्थिक संबंधों की दिशा में एक नया अध्याय है और यह बढती प्रगाढ़ता भारत के लिए चिंता का विषय बन सकती है क्योंकि इस गलियारे के माध्यम से चीन की पहुँच हिन्द महासागर तक हो जायेगी जो कि भारत के लिए कभी भी शुभ खबर नही कही जा सकती है l

क्या भारत चीन के उत्पादों का बहिष्कार कर सकने की स्थिति में है?

Hemant Singh is an academic writer with 7+ years of experience in research, teaching and content creation for competitive exams. He is a postgraduate in International
... Read More
First Published: May 15, 2017, 16:17 IST

आप जागरण जोश पर भारत, विश्व समाचार, खेल के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए समसामयिक सामान्य ज्ञान, सूची, जीके हिंदी और क्विज प्राप्त कर सकते है. आप यहां से कर्रेंट अफेयर्स ऐप डाउनलोड करें.

Trending

Latest Education News