राजस्थान भारत के प्रमुख राज्यों में शामिल है, जो कि क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा राज्य है। यह कुल 342,239 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहां मौजूद अलग-अलग जिलों की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। इस कड़ी में यहां एक जिला ऐसा भी है, जिसे राजस्थान का ‘लाल शहर’ भी कहा जाता है। क्या है इसके पीछे की वजह और कौन-सा है यह जिला, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
किस जिले को कहा जाता है ‘लाल शहर’
अब हम यह जान लेते हैं कि किस जिले को लाल शहर कहा जाता है। आपको बता दें कि बीकानेर को 'लाल शहर' भी कहा जाता है। जयपुर को जिस तरह 'पिंक सिटी' और जोधपुर को 'ब्लू सिटी' के रूप में जाना जाता है, ठीक उसी तरह बीकानेर के ऐतिहासिक भूगोल और इसकी वास्तुकला की वजह से इसे राजस्थान की 'रेड सिटी' कहा जाता है।
बीकानेर को ‘लाल शहर’ कहने का कारण
बीकानेर के पास दुल्मेरा नाम का एक स्थान है, जहां अधिक मात्रा में अच्छी क्वालिटी वाला लाल बलुआ पत्थर पाया जाता है। बीकानेर के संस्थापकों, राजाओं और व्यापारियों ने शहर के किलों, महलों, हवेलियों, मंदिरों और यहां तक कि आम घरों के निर्माण में इसी दुल्मेरा के लाल पत्थर का उपयोग किया है। यह पत्थर धूप पड़ने पर हल्के लाल और शाम के समय गहरे लाल-गुलाबी रंग में चमकता है, जिससे पूरा पुराना शहर लाल रंग में नजर आता है।
बीकानेर की ये हवेलियां हैं प्रसिद्ध
बीकानेर अपनी हवेलियों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। पुराने शहर में 400 से अधिक बड़ी हवेलियां हैं, जिनमें रामपुरिया हवेलियां, कोठारी हवेलियां और बाफना हवेलियां प्रमुख हैं। ये सभी हवेलियां पूरी तरह से लाल बलुआ पत्थर को तराशकर बनाई गई हैं। इन पर की गई बारीक जालियों और झरोखों की नक्काशी लाल रंग के बेस पर बनी है, जिससे बीकानेर की पतली गलियों में चलने पर चारों तरफ केवल लाल रंग ही नजर आता है।
जूनागढ़ का किला
बीकानेर में 1589-1594 ई. में महाराजा राय सिंह द्वारा बनाया गया जूनागढ़ किला बीकानेर के 'रेड सिटी' होने का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। यह किला राजस्थान के अन्य पहाड़ी किलों के तुलना में मैदानी क्षेत्र में बना है। इसकी दीवारें, बुर्ज और महल दुल्मेरा के लाल पत्थर से बने हैं। दूर से देखने पर यह किला एक बड़ा लाल गढ़ की तरह दिखाई देता है।
