भारत कुल 7 देशों के साथ स्थलीय और 2 देशों के साथ जलीय सीमा साझा करता है। इनमें बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से लेकर श्रीलंका तक शामिल है। इन देशों के साथ भारत की अलग-अलग सीमा लगती है, जिनमें कुछ सीमाएं बहुत बड़ी हैं, तो कुछ सीमाएं बहुत छोटी हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत का सबसे छोटा पड़ोसी देश कौन-सा है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
भारत का सबसे छोटा पड़ोसी देश
यदि हम समुद्री सीमा वाले पड़ोसी देशों को शामिल करते हैं, तो भारत का सबसे छोटा पड़ोसी देश मालदीवहै। वहीं, अगर केवल स्थलीय सीमासाझा करने वाले पड़ोसी देशों की बात की जाए, तो भूटानभारत का सबसे छोटा पड़ोसी देश है। दक्षिण एशिया में हिंद महासागर में स्थित मालदीव क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों ही रूप से भारत का सबसे छोटा पड़ोसी देश है।
कितना बड़ा है मालदीव
मालदीव का कुल एरिया 298 वर्ग किलोमीटर है। यहां की जनसंख्या 5 लाख से अधिक है। यह भारत के लक्षद्वीप समूह के ठीक दक्षिण में स्थित एक द्विपीय देश है। मालदीव प्रवाल द्वीपों से बना हुआ है। पर्यटन इसका मुख्य आर्थिक आधार है। भारत और मालदीव के बीच बहुत मजबूत व्यापारिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं।
स्थल सीमा से जुड़ा सबसे छोटा पड़ोसी देश
यदि भारत से सीधी जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की बात की जाए, तो भूटान सबसे छोटा देश है। यह लगभग 38,394 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहां की जनसंख्या करीब 8 लाख है।
भारत के साथ भूटान की सीमा
भूटान भारत के 4 राज्यों सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम और अरुणाचल प्रदेश के साथ 699 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। इसकी राजधानी थिम्फू है।
भूटान की मुख्य विशेषताएं और भारत के साथ संबंध
भूटान पूर्वी हिमालय में बसा एक चारों तरफ से भूमि से घिरा देश है। यह उत्तर में चीन और दक्षिण, पूर्व तथा पश्चिम में भारत से घिरा हुआ है। भूटान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जो अपनी आर्थिक प्रगति को GDP के बजाय अपने नागरिकों की 'खुशहाली' (GNH) से मापता है।
भूटान की नीतियों के अनुसार, देश के कम से कम 60% भूभाग पर जंगलों का होना अनिवार्य है। यह दुनिया के गिने-चुने 'कार्बन नेगेटिव' देशों में शामिल है, यानी यह जितना कार्बन उत्सर्जन करता है, उससे कहीं अधिक अवशोषित कर लेता है। भारत और भूटान के बीच 1949 में 'मित्रता संधि' (Treaty of Friendship) हुई थी।
भारत भूटान की रक्षा, जलविद्युत परियोजनाओं (Hydroelectric Projects) और बुनियादी ढांचे के विकास में बहुत बड़ा सहयोगी है। आपको बता दें कि भारतीय नागरिक बिना वीजा के केवल वैध पहचान पत्र के आधार पर भूटान की यात्रा कर सकते हैं।
