उत्तर प्रदेश में राशन की दुकानों पर काम करने वाले कोटेदारों के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब उन्हें सिर्फ ‘कोटेदार’ नहीं कहा जाएगा, बल्कि ‘अन्नपूर्णा भवन संचालक’ (Annapurna Bhavan Operators) के नाम से जाना जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने उनके कमीशन में भी बढ़ोतरी की है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में लखनऊ के लोक भवन में ई-पास आधारित कोटेदार कमीशन प्रणाली की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब ‘कोटेदार’ शब्द सुनते ही लोगों के मन में गलत धारणा बन जाती थी। सरकार ने डिजिटल व्यवस्था और पारदर्शी राशन वितरण के जरिए इस छवि को बदलने की कोशिश की है।
90 से बढ़कर 125 रुपये हुआ कमीशन
सरकार ने अन्नपूर्णा भवन संचालकों का कमीशन 90 रुपये से बढ़ाकर 125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। इतना ही नहीं, राज्य सरकार ने केंद्र से कमीशन में 25 रुपये प्रति क्विंटल और बढ़ाने की सिफारिश भी की है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र की ओर से मार्जिन मनी में 10 रुपये की बढ़ोतरी के बाद राज्य सरकार ने अपनी तरफ से 25 रुपये जोड़े हैं। यानी कुल मिलाकर 35 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।
अब सिर्फ राशन की दुकान नहीं रहेगा अन्नपूर्णा भवन
योगी सरकार प्रदेश की उचित मूल्य की दुकानों को अब ‘अन्नपूर्णा भवन’ के रूप में विकसित कर रही है। इन भवनों में दुकान के साथ वेयरहाउस की सुविधा भी होगी। इसके लिए सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
खास बात यह है कि इन अन्नपूर्णा भवनों से अब 39 तरह की खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की सुविधा दी जाएगी। संचालक डिजिटल सिस्टम के जरिए सरकार को अपना फीडबैक भी दे सकेंगे।
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ई-Pos से बदली राशन वितरण की तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से सरकार ने राशन वितरण व्यवस्था में ई-पॉस (e-PoS) मशीनों का इस्तेमाल शुरू किया। इसके पीछे उद्देश्य साफ था कि राशन सीधे गोदाम से दुकान तक पहुंचे और बीच में किसी बिचौलिए की गुंजाइश न रहे।
सिंगल-डोरस्टेप डिलीवरी और डिजिटल निगरानी से व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी है। सरकार का दावा है कि इससे राशन वितरण में होने वाली गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े पर भी रोक लगाने में मदद मिली है।
हर महीने मिल रहा मुफ्त राशन
उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में पात्र परिवारों को हर महीने मुफ्त खाद्यान्न दिया जा रहा है। योजना के तहत प्रति व्यक्ति 5 किलो गेहूं और 5 किलो चावल दिया जाता है।
यानी सरकार अब राशन की दुकानों को सिर्फ अनाज बांटने की जगह एक आधुनिक और पारदर्शी खाद्य केंद्र के तौर पर विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कोटेदार से ‘अन्नपूर्णा भवन संचालक’ तक का बदलाव इसी कोशिश का हिस्सा है।
