दुनिया में किसी भी देश के विकास के लिए लोक निर्माण विभाग बहुत ही महत्त्वपूर्ण विभाग माना जाता है। इस कड़ी में भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी हमें लोक निर्माण विभाग देखने को मिलता है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में लोक निर्माण विभाग की शुरुआत कैसे हुई थी और इसका जनक किसे कहा जाता है ? यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
किसे कहा जाता है PWD का जनक
भारत में लॉर्ड डलहौजीको पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) का जनक माना जाता है। लॉर्ड डलहौजी 1848 से 1856 तक भारत के गवर्नर-जनरल रहे। उनके शासनकाल में भारत के बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव आए, जिसके कारण उन्हें आधुनिक भारत के प्रशासनिक और निर्माण ढांचे का शिल्पकार भी कहा जाता है।
PWD की स्थापना कैसे हुई
डलहौजी के आने से पहले सार्वजनिक निर्माण और सड़कों का काम मुख्य रूप से 'मिलिट्री बोर्ड' के अधीन होता था, जिसके कारण निर्माण कार्यों में काफी देरी होती थी और दक्षता की कमी थी। लॉर्ड डलहौजी ने मिलिट्री बोर्ड से निर्माण कार्यों का नियंत्रण छीनकर एक अलग 'सार्वजनिक निर्माण विभाग' (Public Works Department - PWD) की स्थापना की थी।
इंजीनियरों की हुई नियुक्ति
डलहौजी ने इस विभाग के तहत भारत भर में सड़कों, नहरों, पुलों और सरकारी भवनों के निर्माण के लिए एक ढांचा तैयार किया और योग्य सिविल इंजीनियरों की नियुक्ति शुरू की।
डलहौजी द्वारा PWD में किए गए प्रमुख कार्य
-डलहौजी के PWD ने ग्रैंड ट्रंक रोड का पक्कीकरण कराया, जो कोलकाता से पेशावर तक जाती थी।
-1854 में ऊपरी गंग नहर का उद्घाटन हुआ। यह उस समय की दुनिया की सबसे बड़ी सिंचाई नहरों में से एक थी, जिसने उत्तर भारत में कृषि क्रांति की नींव रखी।
-बारी दोआब नहर का निर्माण भी PWD के तहत कराया गया।
-PWD मुख्य रूप से भवन, सड़क और नहर निर्माण से जुड़ा था, लेकिन डलहौजी ने ही 1853 में भारत की पहली यात्री ट्रेन मुंबई से ठाणे के बीच चलवाई थी। यही वजह है कि उन्हें 'भारतीय रेलवे का जनक' भी कहा जाता है।
-उन्होंने भारत में बिजली से चलने वाली टेलीग्राफ सेवा और Post Office Act, 1854 की शुरुआत की।
