Education Policy 2026: एनईपी 2020 के अंदर बड़ा कदम, बिहार में भोजपुरी, मैथिली और मगही संग 6 क्षेत्रीय लैंग्वेज में होगी शुरुआती पढ़ाई

Class 1 & 2 Regional Language Books Bihar: बिहार सरकार ने शैक्षणिक सशन 2026-27 से कक्षा 1 और 2 के बच्चों के लिए भोजपुरी, मैथिली और मगही समेत छह क्षेत्रीय लैंग्वेज में पढ़ाई कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इससे नन्हे छात्रों के लिए शिक्षा बेहद आसान और रोचक हो जाएगी।    

Nov 5, 2026, 17:22 IST
Class 1 & 2 Regional Language Books Bihar
Class 1 & 2 Regional Language Books Bihar

Bihar Regional Language Education: छोटे बच्चों के लिए प्राथमिक शिक्षा को और अधिक आसान, सहज और रोचक बनाने की दिशा में बिहार सरकार ने एक बेहद सराहनीय और क्रांतिकारी कदम उठाया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की सिफारिशों के अनुरूप, आने वाले शैक्षणिक सेशन 2026-27 से बिहार के सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 और कक्षा 2 के नन्हे छात्रों को उनकी अपनी मातृभाषा और क्षेत्रीय बोलियों में शिक्षा प्रदान की जाएगी।

आम तौर पर जब बच्चा पहली बार स्कूल की देहरी लांघता है, तो घर की बोली और स्कूल की भाषा में अंतर होने के कारण उसे शुरुआती पढ़ाई समझने में कठिनाई होती है। इस समस्या के समाधान के लिए राज्य के शिक्षा विभाग ने प्रदेश की प्रमुख छह क्षेत्रीय और लोक भाषाओं को सिलेब्स में शामिल करने का फैसला किया है। आइए जानते हैं इस नई शिक्षा पहल से जुड़ी सभी खास बातें।

Bihar Regional Language Education: मुख्य डिटेल्स 

बिहार बोर्ड द्वारा क्लासेस 1 से लेकर 2 तक के सभी छोटे स्कूली छात्रों के लिए एनईपी 2020 द्वारा 6 क्षेत्रीय लैंग्वेज सिलेब्स में जोड़ी गई है। इससे जुड़ी सभी जानकारी के लिए आप सभी नीचे दी गई टेबल को देख सकते हैं।

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विशेषता / बिंदु 
डिटेल्स 
लागू होने वाला सेशन
शैक्षणिक सेशन 2026-27 से
किन क्लासेस के लिए
कक्षा 1 और कक्षा 2 
शामिल छह क्षेत्रीय लैंग्वेज
भोजपुरी, मैथिली, मगही, बज्जिका, अंगिका और सुरजापुरी
मुख्य उद्देश्य
बच्चों की मातृभाषा के जरिए वैचारिक स्पष्टता और पढ़ाई को आसान बनाना
विशेष सुविधा
राज्य के लगभग 40 लाख छात्रों को इन क्षेत्रीय भाषाओं में मुफ्त पाठ्यपुस्तकें मिलेंगी

किन छह क्षेत्रीय लैंग्वेज को मिली है मंजूरी?

बिहार की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए इस योजना के पहले स्टेप में कुल छह प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों को शामिल किया गया है:

  1. भोजपुरी (Bhojpuri)
  2. मैथिली (Maithili)
  3. मगही (Magahi)
  4. बज्जिका (Bajjika)
  5. अंगिका (Angika)
  6. सुरजापुरी (Surjapuri)

इन भाषाओं में बच्चों के लिए विशेष रूप से आकर्षक और आसान सिलेब्स को तैयार करने का कार्य एससीईआरटी (SCERT) के मार्गदर्शन में सब्जेक्ट एक्सपर्ट और टीचर्स द्वारा तेजी से किया जा रहा है।

इस नई पहल से छात्रों को क्या-क्या लाभ मिलेंगे?

  • सीखने की प्रक्रिया में सुगमता: जब बच्चे अपने घर और आसपास बोली जाने वाली लैंग्वेज में पढ़ाई करते हैं, तो वे सब्जेक्ट जैसे गणित, बुनियादी समझ आदि को बहुत जल्दी और गहराई से समझ पाते हैं।
  • स्थानीय संस्कृति से जुड़ाव: इस सिलब्स के माध्यम से छात्र अपनी स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, लोक पर्वों, मेलों और परिवेश से बेहतर ढंग से जुड़ सकेंगे।
  • आत्मविश्वास में वृद्धि: मातृभाषा में शिक्षा मिलने से बच्चों का झिझक दूर होगा और स्कूल के प्रति उनका डर समाप्त होकर आत्मविश्वास बढ़ेगा।
  • लगभग 40 लाख बच्चों को फायदा: इस योजना के तहत राज्य के करीब 40 लाख प्राथमिक विद्यार्थियों को इन क्षेत्रीय भाषाओं में मुफ्त किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे शिक्षा का सार्वभौमिकरण सुनिश्चित होगा।

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Akshara Verma

Executive - Editorial

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