भारत में कई ऐसे महापुरुष रहे हैं, जिन्हें उनके मूल नाम के अलावा उन्हें मिली विशेष उपाधियों की वजह से जाना जाता है। इस कड़ी में ‘भारत का बिस्मार्क’ भी ऐसी उपाधि रही है, जो कि अपने समय पर बहुत ही प्रसिद्ध रही थी। यह उपाधि सरदार वल्लभभाई पटेल को मिली हुई थी। भारत के इतिहास में उनके महत्त्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उन्हें यह उपाधि दी गई थी। इस लेख में हम उनके बारे में विस्तार से जानेंगे।
क्यों की गई थी बिस्मार्क से तुलना?
सबसे पहले हमें ओटो वॉन बिस्मार्क को जानना जरूरी है। दरअसल, बिस्मार्क नाम का व्यक्ति 19वीं सदी में जर्मनी में एक बड़े राजनेता हुआ करते थे। उन्होंने अपनी सोच और इच्छाशक्ति के दम पर करीब 39 छोटे-छोटे आजाद जर्मन राज्यों को एकजुट कर एक बड़ा जर्मन साम्राज्य स्थापित किया था।
ठीक इसी प्रकार, भारत के आजाद होने के बाद सरदार पटेल ने भारतीय रियासतों का भारत में विलय कराया था। क्योंकि, उस समय भारत में 565 रियासतें हुआ करती थीं, जिन्हें भारत में शामिल होने या फिर आजाद रहने की आजादी दी गई थी।
सरदार पटेल ने उठाई जिम्मेदारी
ऐसी स्थिति में सरदार पटेल ने आगे बढ़ते हुए भारत को एक करने की जिम्मेदारी उठाई। उन्होंने अपनी सूचबूझ का इस्तेमाल करते हुए 560 से अधिक रियासतों को भारतीय संघ में शामिल होने के लिए राजी कर लिया था। उनके द्वारा समझाने पर रियासतें भारत में शामिल होने पर मान गई थी, लेकिन जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर जैसी कुछ रियासतों ने आजाद रहने या पाकिस्तान के साथ जाने की कोशिश की।
ऐसे में पटेल ने हैदराबाद के निजाम को भारत में मिलाने के लिए 'ऑपरेशन पोलो' का सहारा लिया, जबकि जूनागढ़ को लोगों की रजामंदी के जरिए भारत का हिस्सा बना लिया था।
IAS और IPS सेवा के लिए जाने जाते हैं पटेल
पटेल ने भारत में एक मजबूत प्रशासनिक ढांचे की भी नींव रखी थी। उनका मानना था कि एक मजबूत और आजाद नौकरशाही के बिना भारत का शासन बेहतर तरीके से नहीं चल सकता है। इसके लिए उन्होंने ऑल इंडिया सर्विस का समर्थन किया। उन्होंने इन सेवाओं को Steel Frame of India कहा था, जिससे भारत में IAS और IPS जैसी सेवाओं को बढ़ावा मिला।
पटेल बने भारत के 'लौह पुरुष'
सरदार पटेल की इच्छाशक्ति के कारण ही उन्हें भारत का ‘लौह पुरुष’ भी कहा गया। आज उनके नाम पर सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी भी है, जहां IPS अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाती है।
