भारत को विविधताओं का देश कहा जाता है। यहां कुल 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। इन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। इस कड़ी में भारत में इकलौता राज्य ऐसा भी है, जो कि गरीबी मुक्त राज्य बना है। कौन-सा है यह राज्य, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
भारत का पहला गरीबी मुक्त राज्य
भारत का पहला और इकलौता पूरी तरह गरीबी मुक्त राज्य केरल है। केरल ने बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index) को जीरो के लेवल पर लाकर और राज्य स्तर पर चलने वाली Extreme Poverty Eradication Scheme के माध्यम से यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
क्या कहते हैं नीति आयोग के आंकड़ें
नीति आयोग द्वारा जारी राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक के अनुसार, केरल देश में सबसे कम बहुआयामी गरीबी वाला राज्य है, जहां गरीबी का स्तर 0.55% से भी कम पाया गया। देश के अन्य राज्यों में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली आबादी का कुल प्रतिशत अधिक था, वहीं केरल ने स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीनों प्रमुख क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन किया है।
केरल ने यह उपलब्धि कैसे हासिल की?
केरल के पूरी तरह गरीबी मुक्त बनने के पीछे कई सालों की सामाजिक नीतियां, शिक्षा और योजनाओं का हाथ रहा है। केरल सरकार ने 2021 में राज्य भर में माइक्रो-लेवल सर्वे कराकर लगभग 64,000 बहुत ही गरीब परिवारों की पहचान की। इसके बाद हर परिवार की आवश्यकता जैसेः भोजन, स्वास्थ्य, आश्रय, आय के साधन के अनुसार व्यक्तिगत योजना बनाकर उन्हें गरीबी से बाहर निकाला।
-केरल में 1998 में शुरू किया गया कुदुम्बश्री मॉडल महिला सशक्तीकरण और गरीबी उन्मूलन में केरल की सफलता की रीढ़ है। इसके तहत लाखों महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर वित्तीय सहायता, स्वरोजगार और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की गई।
-केरल देश का पहला पूर्ण साक्षर राज्य है। शिक्षा के उच्च स्तर ने लोगों को कुशल रोजगार और खाड़ी देशों में आजीविका के अवसर प्रदान किए, जिससे राज्य में बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा आई।
-केरल की प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली और मजबूत राशन व्यवस्था ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी नागरिक बुनियादी पोषण और चिकित्सा सुविधाओं से वंचित न रहे। यही वजह है कि इन सभी कारणों से केरल भारत का पहला गरीबी-मुक्त राज्य बना है।
