भारत में आजादी की पहली सुबह 15 अगस्त, 1947 को हुई थी। हालांकि, इसकी शुरुआत 14 अगस्त की रात से ही हो गई थी। यह देश की एक बड़ी ऐतिहासिक रात थी, क्योंकि इस रात के खत्म होने के साथ ही भारत से हमेशा-हमेशा के लिए गुलामी की दास्ता भी खत्म हो गई थी। इस लेख में हम 14 अगस्त की रात से 15 अगस्त तक की सुबह तक की पूरी टाइमलाइन देखेंगे।
रात 10 बजे संविधान सभा की बैठक शुरू
संसद भवन के सेंट्रल हॉल में 14 अगस्त की रात 10 बजे भारत की संविधान सभा की ऐतिहासिक अंतिम बैठक शुरू हुई। इसकी अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने की।
वंदे मातरम का गान
14 अगस्त की रात 10:30 बजे स्वतंत्रता सेनानी सुचेता कृपलानी द्वारा राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' गाया गया।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने दिया भाषण
रात 10:45 बजे संविधान सभा के सभापति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा सभा को संबोधित किया गया और उन्होंने देश की चुनौतियों पर बात की।
जवाहरलाल नेहरू का ऐतिहासिक भाषण Tryst with Destiny
रात 11 बजकर 20 मिनट पर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपना विश्वप्रसिद्ध भाषण Tryst with Destiny दिया।
आजादी का संकल्प लिया गया
रात 11:55 बजे संविधान सभा के सभी सदस्यों ने भारत माता और उसकी जनता की सेवा करने की शपथ ली।
आजादी का आधिकारिक बिगुल फूंका गया
15 अगस्त यानि कि ठीक रात 12:00 बजे जैसे ही घड़ी की सुइयों ने 12 बजाए, भारत आधिकारिक रूप से एक आजाद देश बन गया। संसद भवन में 'भारत माता की जय', 'इंकलाब जिंदाबाद' और 'महात्मा गांधी की जय' के नारों से पूरा हॉल गूंज उठा।
राष्ट्रीय ध्वज प्रस्तुत किया गया
रात 12:05 बजे हंसा मेहता ने भारत की सभी महिलाओं की ओर से आजाद भारत का तिरंगा झंडा संविधान सभा को सौंपा।
रात 12:15 बजे जन-गण-मन
सुचेता कृपलानी ने 'जन गण मन' गाया और संसद भवन का सत्र समाप्त हुआ। इसके तुरंत बाद पंडित नेहरू और डॉ. राजेंद्र प्रसाद वाइसरॉय हाउस यानि कि आज का राष्ट्रपति भवन पहुंचे और लॉर्ड माउंटबेटन को आधिकारिक रूप से सूचित किया कि भारत आजाद हो चुका है और उन्हें आजाद भारत का पहला गवर्नर-जनरल माना गया है।
मंत्रिमंडल क शपथ ग्रहण
15 अगस्त की सुबह 08:30 बजे गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को आजाद भारत के पहले पीएम के रूप में शपथ दिलाई और उनके मंत्रियों ने भी पद की शपथ ली।
फहराया गया तिरंगा
लाल किले पर सुबह 10 बजे पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पहली बार आजाद भारत का तिरंगा फहराया और देश को संबोधित किया। इस दौरान 21 तौपों की सलामी दी गई।
