भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें यहां कई ऐतिहासिक किले देखने को मिलते हैं। ये किले अपने समृद्ध इतिहास के साथ-साथ वास्तुकला के लिए भी जाने जाते हैं। इनमें कुछ किले ऐसे हैं, जो कि वीरान पड़े हैं, जबकि कुछ किले आज भी ऐसे हैं, जिनमें राजा-महाराजाओं के वंशजों के साथ-साथ अन्य लोग भी रहते हैं। इस कड़ी में भारत में एक किला ऐसा भी है, जिसमें पूरा का पूरा शहर बसता है। कौन-सा है यह किला, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
किस किले में बसता है पूरा शहर
आपको बता दें कि जिस किले के अंदर पूरा शहर बसता है, उसे स्थापत्य कला की भाषा में 'लिविंग फोर्ट' कहा जाता है। भारत में ऐसा सबसे प्रसिद्ध और बड़ा किला जैसलमेर का किला है, जिसे 'सोनार किला' या 'सोनगढ़' के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा, राजस्थान के चित्तौड़गढ़ दुर्ग को भी भारत के बड़े लिविंग किलों में गिना जाता है।
किले में 25 फीसदी आबादी
राजस्थान के थार रेगिस्तान के बीच में स्थित जैसलमेर का किला दुनिया के उन बहुत कम किलों में से एक है, जहां आज भी शहर की लगभग एक-चौथाई यानि 25% आबादी किले के परकोटे के अंदर ही रहती है।
किले के अंदर की जीवनशैली
किले के अंदर केवल रहने योग्य मकान ही नहीं, बल्कि पुरानी हवेलियां, दुकानें, हस्तशिल्प बाजार, रेस्टोरेंट, होटल और कैफे बने हुए हैं। किले के चारों ओर 99 बुर्ज बने हैं और इसके अंदर तंग व घुमावदार गालियां हैं, जहां सदियों से लोग अपनी पारंपरिक जीवनशैली में रह रहे हैं।
किले में होता है फ्री प्रवेश
यह एक चालू आवासीय परिसर है, इसलिए इसके बड़े हिस्से में आम जनता और पर्यटकों के आने-जाने पर कोई शुल्क नहीं लगता है।
किले का इतिहास और वास्तुकला
इस किले का निर्माण 1156 ईस्वी में भाटी राजपूत शासक राव जैसल ने कराया था। किला पूरी तरह से पीले बलुआ पत्थरों से बना है। जब सूर्य की किरणें इस पर पड़ती हैं, तो यह सोने की तरह चमकता है, इसीलिए इसे 'सोनार किला' कहा जाता है।
UNESCO की विश्व धरोहर
इस किले को 2013 में 'राजस्थान के पहाड़ी किलों' के तहत UNESCO विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। आपको बता दें कि क्षेत्रफल की हिसाब से भारत का सबसे बड़ा किला चित्तौड़गढ़ दुर्ग है। यह लगभग 700 एकड़ में फैला हुआ है। इस किले के अंदर भी गांव, आवासीय क्षेत्र, ऐतिहासिक कुएं और बावड़ियां, प्रसिद्ध विजय स्तंभ और मंदिर स्थित हैं।
