यूपी के इस जिलें में है 11 चीनी मिलें, करोड़ों का कारोबार और विदेशों तक पहुंचती है चीनी

उत्तर प्रदेश का मुजफ्फरनगर जिला चीनी मिलों के लिए भारत में काफी मशहूर है, वर्तमान में जिले में 11 चीनी मिलें है। 2025-26 के गन्ना आवंटन से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक मेरठ, शामली और बागपत के किसान भी मुजफ्फरनगर की मिलों को गन्ना उपलब्ध कराएं जा रहे है।

Aug 17, 2026, 13:01 IST
चीनी के साथ गुड़ का भी बड़ा कारोबार
चीनी के साथ गुड़ का भी बड़ा कारोबार

यदि उत्तर प्रदेश के किसी एक जिले की पहचान गन्ने से सबसे ज्यादा जुड़ी है, तो मुजफ्फरनगर का नाम सबसे ऊपर आता है। यहां दूर-दूर तक फैले गन्ने के खेत, चीनी मिलों की लंबी चेन और देश के बड़े गुड़ बाजारों में से एक मिलकर इसे खास बनाते हैं। यही वजह है कि मुजफ्फरनगर को ‘शुगर बाउल ऑफ इंडिया’ यानी भारत का शुगर बाउल कहा जाता है। 

हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है। चीनी उत्पादन के आंकड़े आमतौर पर शहर के नहीं, बल्कि पूरे मुजफ्फरनगर जिले के आधार पर जारी किए जाते हैं। 

मुजफ्फरनगर में गन्ने की खेती इतनी ज्यादा क्यों? 

मुजफ्फरनगर की सबसे बड़ी ताकत इसकी भौगोलिक स्थिति है। यह गंगा-यमुना दोआब के बेहद उपजाऊ इलाके में आता है। पर्याप्त सिंचाई और गन्ने के लिए अनुकूल मिट्टी ने यहां इस फसल को किसानों की पसंद बना दिया है। 

2024-25 में कितना गन्ना पेरा गया? 

मुजफ्फरनगर के चीनी उद्योग का अंदाजा पिछले पेराई सीजन के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। 2024-25 में जिले की चीनी मिलों ने करीब 94.7 लाख टन गन्ने की पेराई की, जिससे लगभग 9.6 लाख टन चीनी तैयार हुई। यानी मोटे तौर पर 100 टन गन्ने से करीब 10 टन चीनी निकली।

वहीं, कृषि आंकड़ों के मुताबिक 2024-25 में जिले में करीब 1.64 लाख हेक्टेयर जमीन पर गन्ने की खेती हुई और उत्पादन लगभग 1.51 करोड़ टन रहा।

जिले में कितनी चीनी मिलें हैं? 

जिला प्रशासन की वेबसाइट के मुताबिक मुजफ्फरनगर में 11 चीनी मिलें हैं। इनमें टीकौला, आईपीएल, टिटावी, खतौली की त्रिवेणी इकाई, मंसूरपुर, खैखेड़ी की उत्तम इकाई, भैसाना और मोरना जैसी मिलें शामिल हैं।

खेत से चीनी मिल तक कैसे पहुंचता है गन्ना?

मुजफ्फरनगर की मिलों को गन्ना सिर्फ शहर के आसपास के खेतों से नहीं मिलता। इनका खरीद नेटवर्क जिले के ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ आसपास के जिलों तक भी फैला हुआ है।

2025-26 के गन्ना आवंटन से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक मेरठ, शामली और बागपत के किसान भी मुजफ्फरनगर की मिलों को गन्ना उपलब्ध कराएंगे। खतौली, बुढ़ाना, टिटावी, मंसूरपुर, मोरना और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र जिले के प्रमुख गन्ना बेल्ट माने जाते हैं।

चीनी के साथ गुड़ का भी बड़ा कारोबार

मुजफ्फरनगर की कहानी सिर्फ चीनी मिलों तक खत्म नहीं होती। यहां का गुड़ बाजार भी देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है। जिला प्रशासन इसे दुनिया का सबसे बड़ा गुड़ बाजार बताता है। गन्ने से यहां चीनी के अलावा गुड़, खांडसारी, शीरा और एथेनॉल जैसे उत्पाद भी तैयार होते हैं। 

क्या विदेशों तक जाती है मुजफ्फरनगर की चीनी? 

मुजफ्फरनगर की चीनी का अलग से देश-वार निर्यात आंकड़ा आमतौर पर जारी नहीं होता। इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और भारत के व्यापक चीनी उद्योग का हिस्सा माना जाता है।

भारत की चीनी कई विदेशी बाजारों तक पहुंचती है। 2024 में कच्ची गन्ना चीनी के प्रमुख खरीदारों में तंजानिया, जिबूती, केन्या, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात शामिल रहे। इसके अलावा लीबिया, सूडान, सोमालिया, श्रीलंका, बांग्लादेश और मलेशिया जैसे बाजार भी भारतीय चीनी के लिए महत्वपूर्ण रहे।

आखिर क्यों खास है मुजफ्फरनगर?

मुजफ्फरनगर को ‘शुगर बाउल ऑफ इंडिया’ कहना सिर्फ एक उपनाम नहीं है। इसके पीछे लाखों टन गन्ना, बड़ी खेती, 11 चीनी मिलें, विशाल गुड़ कारोबार और गन्ने से जुड़े दूसरे उद्योगों का पूरा नेटवर्क है।

Bagesh Yadav

Senior Executive - Editorial

आप जागरण जोश पर भारत, विश्व समाचार, खेल के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए समसामयिक सामान्य ज्ञान, सूची, जीके हिंदी और क्विज प्राप्त कर सकते है. आप यहां से कर्रेंट अफेयर्स ऐप डाउनलोड करें.

Trending

Just Now

Result Updates