भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें कई पराक्रमी राजाओं के बारे में पढ़ने को मिलता है। राजाओं ने अपने समय में कई बड़े-बड़े युद्धों में भाग लिया और भारत की कई बड़ी रियासतों को अपने अधीन कर लिया था। यही वजह है कि अखंड भारत का नक्शा बहुत बड़ा माना जाता है। इस कड़ी में भारत में ऐसे राजा भी हुए हैं, जिन्होंने कभी कोई युद्ध नहीं हारा। कौन थे ये राजा, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
किस राजा ने कोई भी युद्ध नहीं हारा
भारतीय इतिहास में कई महान योद्धा और सम्राट हुए हैं, जिन्होंने बड़े साम्राज्यों की स्थापना की, लेकिन गुप्त राजवंश के महान सम्राट समुद्रगुप्त और मराठा साम्राज्य के पेशवा बाजीराव प्रथम को इतिहास में ऐसे पराक्रमी योद्धाओं के रूप में जाना जाता है, जो अपने जीवन में लड़े गए युद्ध में विजयी रहे। इतिहासकारों और विद्वानों द्वारा सबसे प्रमुख रूप से गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त का नाम लिया जाता है।
सम्राट समुद्रगुप्त को कहते हैं 'भारत का नेपोलियन'
गुप्त साम्राज्य के चौथे सम्राट समुद्रगुप्त को प्रसिद्ध इतिहासकार वी. ए. स्मिथ ने 'भारत का नेपोलियन' कहा था। हालांकि, कई इतिहासकार उन्हें नेपोलियन से भी महान मानते हैं, क्योंकि नेपोलियन वाटरलू के युद्ध में हार गया था, जबकि समुद्रगुप्त ने अपने जीवन में 100 से अधिक युद्ध लड़े और एक भी नहीं हारा।
प्रयाग प्रशस्ति से मिलता है प्रमाण
प्रयागराज (इलाहाबाद) में स्थित 'प्रयाग प्रशस्ति' स्तंभ अभिलेख में उनके दरबारी कवि हरिषेण ने समुद्रगुप्त की सैन्य विजयों का विस्तृत वर्णन किया है। उन्होंने 'आर्यावर्त' यानि उत्तर भारत के 9 राजाओं को और 'दक्षिणापथ' यानि दक्षिण भारत के 12 राजाओं को पराजित किया था। अपनी जीत को लेकर उन्होंने 'अश्वमेध यज्ञ' का आयोजन कराने के साथ सिक्के जारी किये थे, जिन पर उन्हें 'अश्वमेध पराक्रम:' और 'कविराज' के रूप में दर्शाया गया है।
41 युद्धों में कभी न हारने वाले योद्धा
18वीं शताब्दी (1720–1740) में मराठा साम्राज्य के पेशवा बने बाजीराव प्रथम को भारत के सैन्य इतिहास का सबसे कुशल रणनीतिकार माना जाता है। अपने 20 साल के सैन्य करियर में बाजीराव प्रथम ने लगभग 41 से 42 बड़े युद्ध लड़े और वह हर एक युद्ध में विजयी रहे। उन्होंने अपनी तेज तर्रार घुड़सवार सेना और छापेमार युद्ध रणनीति के बल पर मुगलों, निजाम और पुर्तगालियों को हर बार परास्त किया था।
आपको बता दें कि हैदराबाद के निजाम के खिलाफ पालखेड का युद्ध सैन्य रणनीति का एक ऐसा मास्टरपीस माना जाता है, जिसे आज भी दुनिया भर की सैन्य अकादमियों में पढ़ाया जाता है।
