भारत का सबसे पुराना बांध, जिसका 2000 साल पहले हुआ था निर्माण

Last Updated: Nov 2, 2026, 08:30 IST

भारत में आपने अलग-अलग बांधों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत का सबसे पुराना बांध कौन-सा है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।

सबसे पुराना बांध
सबसे पुराना बांध

भारत के अलग-अलग राज्यों में हमें अलग-अलग बांध देखने को मिलते हैं। आपने विभिन्न बांधों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप भारत के सबसे पुराने बांध से वाकिफ हैं कि यह कौन-सा बांध है और कहां पर स्थित है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे। 

भारत का सबसे पुराना बांध

भारत का सबसे पुराना और दुनिया के सबसे पुराने चालू बांधों में से एक 'कल्लनई बांध' (Kallanai Dam) है। इसे 'ग्रैंड एनीकट' के नाम से भी जाना जाता है। यह बांध तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर कावेरी नदी पर स्थित है।

कब हुआ था निर्माण 

इस ऐतिहासिक बांध का निर्माण चोल राजवंश के महान शासक राजा करिकाल चोल ने दूसरी शताब्दी ईस्वी में करवाया था। इस बांध का मुख्य उद्देश्य कावेरी नदी के बाढ़ के पानी को रोककर उसे डेल्टा क्षेत्रों की ओर मोड़ना था, ताकि सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सके। इस बांध के निर्माण ने ही तंजावुर जिले को 'तमिलनाडु का चावल का कटोरा' बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी।

अनूठी इंजीनियरिंग से बना है बांध 

कल्लनई बांध पुरानी भारतीय हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग का एक चमत्कार माना जाता है। यह बिना किसी सीमेंट या आधुनिक बिल्डिंग मटिरियल के केवल कच्चे और अनगढ़े पत्थरों से बना है। बांध लगभग 329 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा और 5.4 मीटर ऊंचा है। कावेरी नदी के तल में केवल रेत थी, जिस पर किसी ठोस ढांचे को खड़ा करना असंभव था। चोल इंजीनियरों ने एक अनोखी तकनीक अपनाई। उन्होंने बड़े-बड़े पत्थरों को नदी में डाल दिया।

पानी के बहाव से पत्थरों के नीचे की रेत खिसक गई और पत्थर नदी के तल में धंस गए। जब एक पत्थर अच्छी तरह जम गया, तोउसके ऊपर दूसरा पत्थर रखकर विशेष प्रकार की मिट्टी से उन्हें जोड़ दिया गया। यह नींव इतनी मजबूत साबित हुई कि 2000 साल बाद आज भी यह बांध टिका हुआ है।

क्या है मौजूदा हालत 

आज यह बांध केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं है, बल्कि आज भी यह पूरी तरह से चालू है। राजा करिकाल चोल द्वारा बनाया गया यह ढांचा आज भी तमिलनाडु के लगभग 10 लाख एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी प्रदान करता है। यह दुनिया के लिए एक जीवंत उदाहरण है कि पुरानी भारतीय वास्तुकला और जल प्रबंधन तकनीक कितनी एडवांस और टिकाऊ थी।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Nov 2, 2026, 08:30 IST

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