आज से 97 साल पहले क्यों और किसने की थी ‘दीपावली घोषणा’, जानें पूरा इतिहास

Last Updated: Oct 31, 2026, 16:26 IST

साल 1929 में 31 अक्टूबर को अंग्रेजों द्वारा दीपावली घोषणा की गई थी। यह घोषणा भारतीय स्वंतत्रता संग्राम के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई थी। क्या थी यह घोषणा, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।

दीपावली
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भारत के इतिहास में 97 साल पहले यानि 31 अक्टूबर, 1929 को एक महत्त्वपूर्ण घोषणा हुई थी, जिसे ‘दीपावली घोषणा’ के नाम से जाना जाता है। इस घोषणा का महत्त्व भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बहुत ही महत्त्वपूर्ण माना जाता है, जो कि अंग्रेजों द्वारा की गई थी। हालांकि, इसे लेकर कई गतिरोध देखने को मिले। क्या थी यह घोषणा और किसने थी और क्या था इसके पीछे का कारण, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें। 

कब हुई थी दीपावली घोषणा

31 अक्टूबर 1929 को भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन द्वारा की गई 'दीपावली घोषणा' (Deepavali Declaration) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण राजनीतिक मील का पत्थर थी। यह घोषणा भारत में बढ़ते राजनीतिक तनाव को कम करने और साइमन कमीशन के विरोध के बाद भारतीयों का भरोसा जीतने का एक प्रयास था।

क्यों हुई थी घोषणा

1928 में जब साइमन कमीशन भारत आया, तो उसमें एक भी भारतीय सदस्य न होने के कारण पूरे देश में इसका विरोध हुआ। इसके जवाब में भारतीयों ने 'नेहरू रिपोर्ट' तैयार की, जिसमें ब्रिटिश सरकार से भारत को 'डोमिनियन स्टेटस' देने की मांग की गई। देश में राष्ट्रवाद और क्रांतिकारी गतिविधियां जोर पकड़ रही थीं। इस स्थिति को शांत करने के लिए लॉर्ड इरविन इंग्लैंड गए और वहां ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड से बात करने के बाद भारत लौटकर यह ऐतिहासिक घोषणा की।

दीपावली घोषणा के मुख्य बिंदु

-लॉर्ड इरविन ने आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया था कि 1917 की मोंटेग्यू घोषणा का आखिरी उद्देश्य भारत को ब्रिटिश साम्राज्य के अंदर 'डोमिनियन स्टेटस' प्रदान करना है।

-इरविन ने घोषणा की कि साइमन कमीशन की रिपोर्ट आने के बाद ब्रिटिश सरकार लंदन में एक 'गोलमेज सम्मेलन' आयोजित करेगी। इसमें ब्रिटिश सरकार, ब्रिटिश भारत के राजनीतिक नेताओं और देशी रियासतों के प्रतिनिधियों को एक साथ बैठकर भारत के संविधान की रूपरेखा पर चर्चा करने के लिए बुलाया जाएगा।

घोषणा का क्या रहा असर

शुरुआत में भारतीय नेताओं ने इस घोषणा का स्वागत किया। महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू और तेज बहादुर सप्रू जैसे प्रमुख नेताओं ने नवंबर 1929 में एक बैठक की और 'दिल्ली घोषणापत्र' जारी किया। कांग्रेस ने गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए कुछ शर्तें रखीं, जिनमें प्रमुख थी कि सम्मेलन का उद्देश्य यह तय करना नहीं होना चाहिए कि डोमिनियन स्टेटस कब दिया जाएगा, बल्कि यह होना चाहिए कि डोमिनियन स्टेटस का संविधान तुरंत कैसे लागू किया जाए।

कैसे फेल हुई दीपावली घोषणा

23 दिसंबर 1929 को महात्मा गांधी और मोतीलाल नेहरू ने लॉर्ड इरविन से मुलाकात की और उनसे डोमिनियन स्टेटस लागू करने की समय-सीमा मांगी। लॉर्ड इरविन ने कोई भी स्पष्ट समय-सीमा या गारंटी देने से साफ इन्कार कर दिया। यहीं से दीपावली घोषणा का प्रभाव खत्म हो गया।

भारतीय इतिहास पर क्या पड़ा असर

-जब इरविन ने कोई निश्चित वादा नहीं किया, तो कांग्रेस को समझ आ गया कि डोमिनियन स्टेटस की मांग बेइमानी है। इसके ठीक बाद दिसंबर 1929 में कांग्रेस का ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन हुआ।

-कांग्रेस ने अपनी पुरानी 'डोमिनियन स्टेटस' की मांग को हमेशा के लिए छोड़ दिया और 'पूर्ण स्वराज्य' का प्रस्ताव पारित किया।

-इसी घटना के कारण 26 जनवरी 1930 को पूरे देश में पहला 'स्वतंत्रता दिवस' मनाया गया और गांधीजी ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ अपना प्रसिद्ध 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' (दांडी मार्च) शुरू करने का फैसला लिया।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Oct 31, 2026, 16:26 IST

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