उत्तर प्रदेश अपने समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। यह राज्य देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है, जो कि 240,928 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। आपने इस राज्य की राजधानी लखनऊ के बारे में पढ़ा और सुना ही होगा, जिसे ‘नवाबों का शहर’ भी कहा जाता है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि यूपी में लखनऊ के अलावा भी एक शहर ऐसा है, जिसे ‘नवाबों का शहर’ भी कहा जाता है। कौन-सा है यह जिला और क्या है वजह, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
कौन-सा जिला कहलाता है ‘नवाबों का शहर’
उत्तर प्रदेश का रामपुर शहर वह जिला है, जिसे ‘नवाबों का शहर’ भी कहा जाता है। यह जिला अपने समृद्ध इतिहास, शाही विरासत और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। इसे ‘नवाबों का शहर’ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि लगभग दो शताब्दियों तक इस क्षेत्र पर रोहिला नवाबों का सीधा शासन रहा था। उन्होंने न केवल इस शहर की स्थापना की और प्रशासनिक बागडोर संभाली, बल्कि इसकी कला, संगीत, साहित्य, वास्तुकला और खान-पान को भी एक शाही पहचान दी।
रियासत की स्थापना और नवाबों का इतिहास
रामपुर रियासत की नींव 1774 ईस्वी में नवाब फैजुल्लाह खान ने रखी थी। वह रोहिला अफगान सरदार अली मोहम्मद खान के बेटे थे। अवध के नवाब शुजाउद्दौला और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ हुई शुजाउद्दौला संधि के बाद रामपुर एक आजाद रियासत के रूप में अस्तित्व में आया। फैजुल्लाह खान रामपुर के पहले नवाब बने और उन्होंने ही इस क्षेत्र को एक व्यवस्थित शहर के रूप में विकसित करना शुरू किया।
रामपुर की फेमस लाइब्रेरी
रामपुर के नवाब कला और ज्ञान के संरक्षक थे। नवाबों के इसी संरक्षण के कारण रामपुर शिक्षा और पांडुलिपियों का एक प्रमुख केंद्र बना। नवाब फैज़ुल्लाह खानसे लेकर नवाब रजा अली खान तक, सभी शासकों ने कई ग्रंथों और कलाकृतियों को सहेजने में योगदान दिया। इसी परंपरा की देन रामपुर रजा लाइब्रेरी है, जो आज एशिया के सबसे समृद्ध पुस्तकालयों में से एक मानी जाती है। इसमें अरबी, फारसी, उर्दू, तुर्की और संस्कृत की हजारों दुर्लभ पांडुलिपियां, ऐतिहासिक दस्तावेज, पेंटिंग और मुगल काल के दुर्लभ ग्रंथ सुरक्षित हैं।
संगीत और रामपुर-सहसवान घराना
नवाबों ने संगीत जगत में भी योगदान दिया था। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद जब दिल्ली और लखनऊ के शाही दरबार बिखरने लगे, तब रामपुर के नवाबों ने भारत के संगीतकारों, शायरों और विद्वानों को अपने यहां आश्रय दिया। मशहूर गायक और उस्ताद रामपुर दरबार से जुड़े, जिससे शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध 'रामपुर-सहसवान घराने' का जन्म हुआ। प्रसिद्ध शायर मिर्जा गालिब भी रामपुर दरबार से लंबे समय तक जुड़े रहे और उन्हें नवाबों द्वारा वजीफा दिया जाता था।
