राजस्थान में कुल 50 जिले हैं, जिनमें एक जिला ऐसा भी है, जिसे पूरे राजस्थान का ‘अन्न का कटोरा’ भी कहा जाता है। यह जिला उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित है और राजस्थान के कृषि-समृद्ध क्षेत्रों में गिना जाता है। खास बात यह है कि इस जिले के पास ही रेगिस्तान भी है। इसके बावजूद, यह पूरे राजस्थान का पेट भरता है। कौन-सा है यह जिला और क्यों कहा जाता है ‘अन्न का कटोरा’, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
किस जिले को कहा जाता है ‘अन्न का कटोरा’
राजस्थान के उत्तर-पश्चिम में स्थित श्रीगंगानगर जिले को राज्य का 'अन्न का कटोरा'कहा जाता है। यह जिला न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे उत्तर भारत के सबसे उपजाऊ और कृषि-समृद्ध क्षेत्रों में गिना जाता है। पास में ही थार रेगिस्तान के करीब होने के बावजूद इस जिले ने अपनी सिंचाई व्यवस्था और मॉडर्न कृषि तकनीकों से यह उपलब्धि हासिल की है।
क्यों कहा जाता है 'अन्न का कटोरा'
श्रीगंगानगर में गेहूं, धान, जौ और कमर्शियल फसलों जैसे कि कपास, सरसों और किन्नू का इतना अधिक उत्पादन होता है कि यह राज्य की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अन्य राज्यों को भी अनाज आपूर्ति करता है। यही वजह है कि इस जिले को 'अन्न का कटोरा' भी कहा जाता है।
गंग नहर का मिला फायदा
ऐतिहासिक रूप से यह एरिया भी रेगिस्तान का ही हिस्सा था। लेकिन, बीकानेर के तत्कालीन महाराजा गंगा सिंह द्वारा 1927 में 'गंग नहर' लाई गई। इसके बाद इंदिरा गांधी नहर के आने से इस रेगिस्तानी भूमि का पूरी तरह से कायाकल्प हो गया।
नदियों की मिट्टी से मिला है फायदा
नदियों द्वारा लाई गई गाद और नहरों ने यहां की मिट्टी को बेहद उपजाऊ बना दिया है, जिससे यहां साल में दो से तीन फसलें उगाई जाती हैं।
गेंहू का सबसे बड़ा उत्पादक जिला
श्रीगंगानगर राजस्थान में गेहूं का सबसे बड़ा उत्पादक जिला है। यहां का गेहूं पूरे राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और मंडियों की रीढ़ माना जाता है। इसके अलावा, यहां 'नरमा' यानि अमेरिकन कॉटन का भारी मात्रा में उत्पादन होता है, जिसके कारण इसे कपड़ा उद्योग के लिए भी जाना जाता है।
साथ ही, सरसों और चना उत्पादन में भी इस जिले का प्रमुख योगदान है। आपको यह भी बता दें कि श्रीगंगानगर को 'किन्नू का गढ़' कहा जाता है। यहां के रसीले किन्नू भारत के विभिन्न शहरों के साथ-साथ विदेशों में भी निर्यात किए जाते हैं।
