उत्तर प्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है। यहां कुल 75 जिले हैं, जो कि 18 मंडलों में आते हैं। ये सभी मंडल कुल चार संभागों का हिस्सा हैं, जिनमें पूर्वांचल, मध्यांचल, पश्चिमांचल और बुंदेलखंड शामिल है। कुछ किताबों में हमें रोहिलखंड और बघेलखंड का भी जिक्र देखने को मिलता है। राज्य के प्रत्येक जिले की अपनी पहचान है। इस कड़ी में यहां एक जिला ऐसा भी है, जिसे पहले ‘मयराष्ट्र’ के नाम से जाना जाता था। कौन-सा है यह जिला, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
यूपी के किस जिले को कहा जाता था ‘मयराष्ट्र’
यूपी में पश्चिम क्षेत्र के प्रमुख जिलों में शामिल मेरठ जिले को पहले ‘मयराष्ट्र’ नाम से जाना जाता था। इसके पीछे पौराणिक कारण हैं। हालांकि, समय के साथ-साथ यह नाम बिगड़ता गया और अंत में आकर मेरठ हो गया।
क्यों हुआ करता था ‘मयराष्ट्र’ नाम
मेरठ जिले की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक,
‘हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में यह क्षेत्र असुरों के महान राजा और प्रसिद्ध वास्तुकार मयासुर (मय दानव) का साम्राज्य था। उन्होंने ही इस शहर को बसाया और अपनी राजधानी बनाया, जिसके कारण इसे 'मयराष्ट्र' (मय का प्रदेश) कहा गया।’
‘मयराष्ट्र’ से कैसे हुआ मेरठ
अब सवाल है कि आखिर ‘मयराष्ट्र’ से मेरठ नाम कैसे हुआ ? आपको बता दें कि समय के साथ-साथ मयराष्ट्र के नाम में लगातार बदलाव होते गए। इस कड़ी में इसका नाम मयदंत का खेड़ा हुआ और धीरे-धीरे यह मैराठ हुआ। लोगों ने बोलचाल की भाषा में इसे मैराठ से मेरठ कर दिया और आज यह इसका आधिकारिक नाम हो गया है।
मेरठ को कहा जाता है 'खेल का शहर'
आज मेरठ खेल के क्षेत्र में अपनी खास पहचान रखता है। यहां खेल उद्योग प्रमुख उद्योगों में से एक है, जहां खेल क्षेत्र का जुड़ा सामान बनता है। यही वजह है कि मेरठ को भारत में 'खेल का शहर' कहा जाता है। इसके अलावा मेरठ को चीनी उद्योग के लिए भी जाना जाता है। बीते कुछ वर्षों में यहां इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को भी गति मिली है। आपको बता दें कि मेरठ ही भारत का वह जिला है, जहां 10 मई, 1857 को आजादी की क्रांति की शुरुआत हुई थी। आज भी यहां अंग्रेजों के समय की मेरठ कैंट मौजूद है।
