भारत का भूगोल उठाकर देखें, तो हमें यहां अलग-अलग नदियों का प्रवाह देखने को मिलता है। ये नदियां न सिर्फ पीने के पानी तक सीमित हैं, बल्कि सिंचाई और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए भी इनका अधिक महत्त्व है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में एक नदी ऐसी भी है, जो कि बीहड़ का निर्माण करती है ? यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम भारत की एक ऐसी ही नदी के बारे में जानेंगे।
कौन-सी नदी करती है बीहड़ का निर्माण
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि आखिर कौन-सी नदी बीहड़ का निर्माण करती है। आपको बता दें कि यह चंबल नदी है, जो कि बीहड़ का निर्माण करती है। चंबल नदी द्वारा निर्मित कटे-फटे और गहरे खड्डों को "चंबल के बीहड़" कहा जाता है।
क्यों बनते हैं बीहड़
चंबल नदी और इसकी सहायक नदियां बारिश के मौसम में मिट्टी का तेजी से बहाव करती हैं। इस प्रक्रिया को भूगोल की भाषा में Gully Erosion कहा जाता है। इस वजह से उपजाऊ भूमि गहरी घाटियों और ऊंचे-नीचे टीलों में बदल जाती है, जिससे बीहड़ का निर्माण होता है।
कहां से कहां तक है चंबल का बीहड़
चंबल का बीहड़ मुख्य रूप से तीन राज्यों के क्षेत्रों में फैले हुए हैं।
-मध्य प्रदेश: भिंड, मुरैना और श्योपुर जिले
-राजस्थान: धौलपुर, सवाई माधोपुर और करौली जिले
-उत्तर प्रदेश: आगरा और इटावा जिले
-यमुना में संगम: चंबल नदी उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में मुरादगंज व पंचनदा के पास यमुना नदी में जाकर मिल जाती है।
चंबल नदी की कुल लंबाई
चंबल नदी की कुल लंबाई की बात करें, तो यह 1024 किलोमीटर है। हालांकि, कुछ स्रोतो में इसकी लंबाई 960 किलोमीटर है। यह नदी मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित जनापाव पहाड़ी से निकलती है और अंत में उत्तर प्रदेश के इटावा में आकर गिर जाती है। आपको बता दें कि चंबल नदी घड़ियाल और मगरमच्छों के लिए जानी जाती है। इस नदी में बड़ी संख्या में घड़ियाल पाए जाते हैं, जिन्हें देखने के लिए टूरिस्ट सवारी भी होती है। वहीं, घड़ियाल के अलावा इस नदी में कई जलीय जीव भी पाए जाते हैं, जो कि बेहद खतरनाक होते हैं।
