धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, वह साल 2021 से इस पद पर थे। लेकिन अब भी वह भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख चेहरा हैं। उन्हें सत्ताधारी पार्टी के अहम रणनीतिकारों में गिना जाता है। हालांकि, इन पिछले कई दिनों वह NEET और CBSE जैसी महत्त्वपूर्ण परीक्षाओं को लेकर चर्चाओं में बने हुए थे। इस लेख में हम उनके निजी जीवन से लेकर राजनीतिक सफर के बारे में विस्तार से जानेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान का प्रारंभिक जीवन
-जन्म तिथि: 26 जून 1969
-जन्म स्थान: तालचेर, जिला अनुगुल,ओडिशा में हुआ।
-माता-पिता: धर्मेंद्र प्रधान की माता का नाम बसंत मंजरी प्रधान है, जबकि पिता डॉ. देबेन्द्र प्रधान हैं। उनके पिता भी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रह चुके हैं। वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार (1998-2004) में राज्य मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
-वैवाहिक जीवन: धर्मेंद्र प्रधान का विवाह 1998 में मृदुला प्रधान से हुआ था। वर्तमान में उनके दो बच्चे- निमिषा प्रधान और निषांत प्रधान हैं।
धर्मेंद्र प्रधान की शैक्षणिक पृष्ठभूमि
प्रधान की प्रारंभिक शिक्षा ओडिसा में ही पूरी हुई। उन्होंने तालचेर कॉलेज से उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने भुवेश्वर स्थित उत्कल विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक किया। साथ ही, मानव विज्ञान में M.A. की डिग्री प्राप्त की।
छात्र राजनीति से शुरू किया राजनीतिक करियर
धर्मेंद्र प्रधान शुरू से ही राजनीति की तरफ आकर्षित थे। उन्होंने 1983 में एक छात्र के रूप में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़कर अपने राजनीतिक जीवन को दिशा देना शुरू किया। इस दौरान वह तालचेर कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे। उनकी क्षमता को देखते हुए 1995 में उन्हें ABVP का राष्ट्रीय सचिव भी बनाया गया।
कब हुई संसदीय करियर की शुरुआत
धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी राजनीतिक करियर की शुरुआत विधायक बनकर की। वह साल 2000 में ओडिसा की पल्ललहारा विधानसभा सीट से जीते और विधानसभा पहुंचे।
2004 में पहली बार बने सांसद
धर्मेंद्र प्रधान ने साल 2004 में ओडिसा की देवगढ़ सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा और पहली बार सांसद बनकर लोकसभा पहुंचे। वहीं, राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखने के साथ ही पार्टी द्वारा उन्हें युवा शाखा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
2012 से शुरू हुआ राज्यसभा का सफर
साल 2012 में धर्मेंद्र प्रधान बिहार राज्यसभा के लिए चुने गए। वहीं, 2018 में वह मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए।
2024 में जीता लोकसभा चुनाव
साल 2024 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने ओडिसा के संबलपुर सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर मंत्रीमंडल में अपनी जगह को सुरक्षित रखा।
केंद्रीय मंत्री के रूप में महत्त्वपूर्ण कार्यकाल
केंद्र सरकार में धर्मेंद्र प्रधान विभिन्न महत्त्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैंः
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (2014 - 2021)
यह धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक करियर की सबसे लंबी पारी थी। वह पहले मंत्रालय के राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) बने और 2017 में उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में नई पारी की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' का क्रियान्वयन किया। इस योजना के तहत ग्रामीण और वंचित वर्ग की महिलाओं को मुफ्त एलपीजी (LPG) कनेक्शन दिए गए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 'हाइड्रोकार्बन अन्वेषण और लाइसेंसिंग नीति' (HELP) और देशव्यापी सब्सिडी सुधार योजना 'पहल' (PAHAL) को भी लागू करवाया।
इस्पात मंत्रालय (2019 - 2021)
धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम के साथ-साथ इस्पात मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था। इस दौरान उन्होंने देश के पूर्वी हिस्से के औद्योगिक विकास के लिए 'मिशन पूर्वोदय' (Mission Purvodaya) की शुरुआत की थी।
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (2017 - 2024)
प्रधान ने 2017 से 2024 तक कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की भी कमान संभाली।
शिक्षा मंत्रालय (2021 - 25 जुलाई 2026)
साल 2021 में जुलाई माह में एक बड़ा फेरबदल हुआ था और धर्मेंद्र प्रधान को भारत का केंद्रीय शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया था, लेकिन अब उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस कार्यकाल का मुख्य फोकस राष्ट्रीय शिक्षा नीति(NEP 2020) को जमीनी स्तर पर लागू करना रहा। इस दौरान वह UGC के नए नियम, CBSE और NEET जैसे मुद्दों को लेकर कई बार चर्चाओं में रह चुके हैं।
