भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ होंगे। वह देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की जगह लेंगे, जो कि अगले वर्ष यानि 2027 में फरवरी में रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में जस्टिस विक्रम नाथ फरवरी से भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाल सकते हैं। उनका उत्तर प्रदेश से खास कनेक्शन रहा है। कौन हैं जस्टिस विक्रम नाथ, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
जस्टिस विक्रमनाथ का शुरुआती जीवन
जस्टिस विक्रम नाथ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के रहने वाले हैं। उनका जन्म 24 सितंबर, 1962 में हुआ था। वह अपने परिवार की चौथी पीढ़ी हैं, जो कि वकालत के क्षेत्र में हैं। जस्टिस नाथ ने 1983 में साइंस स्ट्रीम में ग्रेजुएशन किया था। उन्होंने 1986 में लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की थी और इसके बाद 1987 यूपी बार काउंसिल में अपना रजिस्ट्रेशन करवाया। उन्होंने 17 साल से भी अधिक समय तक इलाहाबाद कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस की है।
लखनऊ यूनिवर्सिटी से मिला है सम्मान
जस्टिस विक्रम नाथ का नाम मुख्य न्यायाधीश के रूप में सामने आने के बाद लखनऊ यूनिवर्सिटी का लॉ डिपार्टमेंट भी चर्चाओं में है। यूनिवर्सिटी द्वारा 2018 में जस्टिस विक्रम नाथ को ‘डिस्टिंग्विश्ड एलुमनाई अवॉर्ड’ भी दिया गया था। उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी के शिया पीजी कॉलेज से लॉ में ग्रेजुएशन किया था।
सुप्रीम कोर्ट में संभाली है यह जिम्मेदारी
जस्टिस विक्रम नाथ ने अपने कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट में कई बड़ी जिम्मेदारी संभाली है। इस कड़ी में वह सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन रहे हैं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ई-कमेटी के चेयरमैन रहते हुए उन्होंने न्यायपालिका में सूचना और संचार तकनीक के इस्तेमाल की देखरेख की थी। वहीं, वह नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन भी रह चुके हैं।
जस्टिस नाथ के करियर पर एक नजर
-जस्टिस विक्रम नाथ 2004 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में अतिरिक्त जज नियुक्त हुए थे।
-उन्होंने 27 फरवरी, 2006 को स्थायी जज के रूप में शपथ ली थी।
-उन्होंने 15 सालों तक अपनी सेवाएं दी और इसके बाद वह 2019 में गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए। इस दौरान उन्होंने गुजरात हाई कोर्ट की अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग शुरू की। इसे लोगों ने पारदर्शिता को लेकर एक बड़ा कदम माना और उन्हें देश में एक नई पहचान मिली। क्योंकि, वह ऐसा करने वाले पहले हाई कोर्ट के पहले मुख्य न्यायाधीश थे।
