भारत रत्न, भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह पुरस्कार जाति, धर्म, पद या लिंग के भेदभाव के बिना शिक्षा, कला, साहित्य, खेल या सामाजिक सेवा में बेहतर कार्यों के लिए दिया जाता है। भारत में यह विभिन्न लोगों को उनके आसाधरण कार्यों के लिए दिया गया है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान में एकमात्र ऐसे व्यक्ति भी थे, जिन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। कौन हैं यह व्यक्ति, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
भारत में कब हुई थी ‘भारत रत्न’ पुरस्कार की शुरुआत
भारत में ‘भारत रत्न’ की शुरुआत 2 जनवरी, 1954 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी। उस समय यह पुरस्कार आजाद भारत के पहले गवर्नर जनरल सी. राजगोपालचारी, वैज्ञानिक डॉ. सी.वी. रमन और डॉ. सर्वपल्लीराधाकृष्णन को दिया गया था।
पाकिस्तान के किस नागरिक को मिला है ‘भारत रत्न’
अब हम यह जान लेते हैं कि आखिर पाकिस्तान के किस नागरिक को ‘भारत रत्न’ मिला है? आपको बता दें कि उनका नाम खान अब्दुल गफ्फार खान है। उन्हें प्यार से सीमांत गांधी और बादशाह खान नाम से भी जाना था।
कब मिला 'भारत रत्न'
खान अब्दुल गफ्फार खान को 1987 में भारत सरकार की ओर से उनके उल्लेखनीय कार्यों की वजह से ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। वह पाकिस्तान के एकमात्र ऐसे नागिरक हैं, जिन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया गया है।
क्यों मिला था 'भारत रत्न' पुरस्कार
खान अब्दुल गफ्फार खान गांधी जी से अधिक प्रेरित थे, उन्होंने उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत में गांधी जी के विचारों को फैलाया और इस क्षेत्र में हिंसक माने जाने वाले पठानों को शांति का पाठ पढ़ाया। उन्होंने खुदाई खिदमतगार आंदोलन के माध्यम से शिक्षा के महत्त्व, अंधविश्वास के खिलाफ और आपसी भाईचारे के लिए प्रयास किया। साथ ही, महिलाओं की शिक्षा के लिए भी काम किया।
जब भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ, तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया और बंटवारे के बाद पाकिस्तान की कई नीतियों पर आपत्ति जताई, जिसके लिए उन्हें कई सालों तक जेल में भी रहना पड़ा। यही वजह रही कि उनके विभिन्न सामाजिक कार्यों और देश के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भागीदारी को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया। आपको बता दें कि भारत का प्रसिद्ध लाल कुर्ती आंदोलन भी उनके द्वारा चलाया गया था।
