भारत में सड़क निर्माण को लेकर एक ऐसा प्रयोग हुआ है, जिसकी चर्चा अब दुनियाभर में हो रही है। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में दुनिया की सबसे लंबी स्टील स्लैग (Steel Slag) रोड तैयार की गई है, जिसने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया है। खास बात यह है कि इस सड़क में सामान्य पत्थरों की जगह स्टील उद्योग से निकलने वाले स्लैग का इस्तेमाल किया गया है। यानी जिस औद्योगिक कचरे को आमतौर पर बेकार समझा जाता है, उसे सड़क निर्माण की मजबूत सामग्री में बदल दिया गया। चलिए इस अनोखी सड़क के बारे में विस्तार से जानते हैं।
1.85 किलोमीटर लंबी है यह खास सड़क
रायगढ़ में बनी यह सड़क 1.85 किलोमीटर लंबी चार लेन की डिवाइडेड रोड है। इसे भारी व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। प्रोजेक्ट में करीब 2 लाख टन प्रोसेस्ड EAF स्टील स्लैग का इस्तेमाल हुआ है।
यह सड़क सिर्फ रिकॉर्ड बनाने के लिए खास नहीं है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि स्टील स्लैग को सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले एग्रीगेट के तौर पर प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सके।
स्टील स्लैग कैसे बना सड़क के लायक?
स्टील स्लैग को सीधे सड़क में इस्तेमाल नहीं किया गया। पहले इसे कई तकनीकी प्रक्रियाओं से गुजारा गया। इसमें नियंत्रित तरीके से इसकी टिकाऊ और स्थिरीकरण, बची हुई धातु को अलग करना, क्रशिंग, स्क्रीनिंग और ग्रेडिंग जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
इसके बाद इस सामग्री की भौतिक, यांत्रिक, भू-तकनीकी और पर्यावरणीय जांच की गई। सभी जरूरी गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के बाद इसे सड़क की अलग-अलग परतों में इस्तेमाल किया गया।
पत्थरों की जगह 100% स्टील स्लैग
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियतों में से एक है कि सड़क की पूरी पेवमेंट संरचना में प्राकृतिक एग्रीगेट की जगह 100 प्रतिशत स्टील स्लैग का इस्तेमाल किया गया है।
इससे करीब 2 लाख टन प्राकृतिक पत्थरों की बचत हुई। इसका मतलब है कि सड़क निर्माण के लिए पत्थरों की खुदाई, उन्हें प्रोसेस करने और परिवहन की जरूरत को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
लागत में 40% तक की बचत
स्टील स्लैग रोड तकनीक का फायदा सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं है। प्रोजेक्ट के आंकड़ों के अनुसार, इसकी पेवमेंट संरचना पारंपरिक सड़क की तुलना में करीब 35 प्रतिशत पतली है और निर्माण लागत में 40 प्रतिशत तक की बचत का अनुमान है।
इस सड़क को भारी यातायात के लिए तैयार किया गया है और इसकी डिजाइन क्षमता 65 मिलियन स्टैंडर्ड एक्सल रिपीटिशन तक है।
CSIR ने विकसित की स्वदेशी तकनीक
इस तकनीक को CSIR-Central Road Research Institute (CRRI), नई दिल्ली ने निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ विकसित किया है। सरकार अब इस तकनीक को केवल रायगढ़ तक सीमित रखने के बजाय देश के दूसरे हिस्सों में भी इस्तेमाल करने पर जोर दे रही है।
रायगढ़ की यह सड़क इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां कचरे को संसाधन में बदलने, प्राकृतिक संसाधनों की बचत करने और सड़क निर्माण की लागत कम करने की कोशिश एक साथ दिखाई देती है।
