उत्तर प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा राज्य है। यह कुल 240,928 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। प्रदेश में बीते कुछ वर्षों में इंटरनेट का उपयोग बढ़ा है। इसके साथ-साथ AI को लेकर भी लोगों में जागरूकता और और उपयोग, दोनों बढ़े हैं। इस कड़ी में प्रदेश की अदालती कार्यवाही में भी एआई का उपयोग हो रहा है। क्या आप बता सकते हैं कि उत्तर प्रदेश का वह पहला जिला कौन-सा है, जहां अदालती कार्यवाही में एआई का उपयोग किया गया है? यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
यूपी की इस अदालत में हुआ एआई टूल्स का इस्तेमाल
संभल उत्तर प्रदेश का पहला जिला बना है, जहां न्यायिक कार्यवाही में आधिकारिक तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल शुरू किया गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत चंदौसी स्थित संभल जिला न्यायालय में एआई-आधारित न्यायिक व्यवस्था लागू की गई है।
संभल AI कोर्ट मॉडल की मुख्य विशेषताएं
-अदालत में गवाहों, वकीलों और पक्षों की गवाही और बयानों को एआई टूल्स के जरिए तुरंत रिकॉर्ड किया जाता है। यह तकनीक बोले गए शब्दों को रियल-टाइम में डिजिटल टेक्स्ट में बदल देती है।
-पारंपरिक प्रक्रिया में बयान दर्ज करते समय क्लेरिकल गलतियों या बदलाव की आशंका रहती थी। एआई आधारित रिकॉर्डिंग से बयानों में किसी भी तरह की छेड़छाड़ की संभावना खत्म हो जाती है।
-जैसे ही गवाही समाप्त होती है, एआई टूल तुरंत पूरा बयान प्रिंट कर देता है, जिससे उसी समय सभी पक्षों के हस्ताक्षर लिए जा सकते हैं।
-लिखित रिकॉर्डिंग प्रक्रिया में लगने वाले घंटों के समय की बचत होती है, जिससे मुकदमों की सुनवाई में तेजी आई है।
कैसे हुई थी एआई इस्तेमाल की शुरुआत
संभल हिंसा से जुड़े संवेदनशील मुकदमे में पुलिस के बयान दर्ज करने के लिए पहली बार इस एआई सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायमूर्ति की मौजूदगी में इस एआई टूल का इस्तेमाल किया गया था। ऐसे में यूपी का यह जिला पहला एआई जस्टिस वाला जिला भी कहलाता है। इसे लेकर कई बार परीक्षाओं में सवाल भी पूछ लिया जाता है।
