उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की धरती ने देश को पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू दिए थे। वहीं, इसी धरती ने देश को पहली महिला कैबिनेट मंत्री भी दी थी। यह महिला जवाहरलाल नेहरू की बहन थीं, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के दौर में कैबिनेट मंत्री बनकर इतिहास के पन्नों में एक नया अध्याय जोड़ दिया था। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद फूलपूर से उप-चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद फूलपूर लोकसभा सीट से फिर चुनाव लड़ा और विजयी रही।
कौन थीं पहली महिला कैबिनेट मंत्री
भारत की पहली महिला कैबिनेट मंत्री विजय लक्ष्मी पंडित थीं। वह 1937 में संयुक्त प्रांत के विधानमंडल में निर्वाचित हुई थीं और उन्हें कैबिनेट में जगह मिली। उस समय उन्हें जन स्वास्थ्य विभाग में मंत्री बनाया गया था। उन्होंने 1939 और बाद में 1946 से 1947 तक इस पद पर अपनी सेवाएं दीं।
महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष
वी. एल. पंडित ने महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए लंबा संघर्ष किया था। साथ ही, उन्होंने 1956 में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम बनाने के लिए प्रयास किया, जिसके बाद महिलाओं को अपने पति और पिता की संपत्ति में उत्तराधिकार मिला। वह पंडित जवाहरलाल नेहरू से 11 साल छोटी थीं। जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद उन्होंने 1964 में फूलपूर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसी सीट से वह 1967 में भी जीतीं।
भारत के लिए कई बार गईं जेल
वी. एल. पंडित ने आजादी के आंदोलनों में भी भाग लिया था। इस वजह से उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। उन्होंने विदेशों में भारत की आजादी को लेकर भी भाषण दिया, जिससे लोगों में जागरूकता बढ़े। देश आजाद हुआ, तो उन्हें संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के प्रतिनिधि मंडल में भेजा गया और वह पहली महिला अध्यक्ष भी निर्वाचित हुईं। उन्होंने कई देशों में उच्चायुक्त का पद संभाला और 1940 से 1942 तक भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रहीं।
आजाद भारत की पहली महिला कैबिनेट मंत्री
आजाद भारत की पहली महिला कैबिनेट मंत्री की बात करें, तो राजकुमारी अमृत कौर का नाम सबसे पहले लिया जाता है। वह आजाद भारत के पहले मंत्रिमंडल में शामिल थीं और स्वास्थ्य मंत्री का पद संभाला था। उन्होंने 1947 से लेकर 1957 तक स्वास्थ्य मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दीं। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(AIIMS) की स्थापना में उन्होंने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ।
