चावल प्रमुख खाद्यान फसलों में से एक है। दुनिया के विभिन्न देशों में चावल का उत्पादन होता है। इस कड़ी में यदि दुनिया के सबसे बड़े चावल उत्पादक देश की बात करें, तो यह भारत है। भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए चावल उप्तादन में पहला पायदान हासिल किया है, जो कि देश के कृषि इतिहास और अर्थव्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर है। लंबे समय तक चीन इस लिस्ट में टॉप पर बना हुआ था, लेकिन हाल के वर्षों में भारत में रिकॉर्ड फसल और लगातार उत्पादन से भारत ने चीन को पीछे छोड़कर वैश्विक स्तर पर पहला स्थान हासिल कर लिया है।
चावल उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी
दुनियाभर में चावल उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी अब लगभग 28 फीसदी से अधिक हो चुकी है। भारत का कुल चावल उत्पादन 150 से 154 मिलियन मीट्रिक टन के स्तर को पार कर गया है, जबकि चीन का उत्पादन लगभग 146 मिलियन मीट्रिक टन के आसपास है।
भारत के पास चावल खेती के लिए कितनी भूमि
भारत के पास चावल की खेती के लिए दुनिया का सबसे बड़ा भू-भाग है, जो कि लगभग 47 से 52 मिलियन हेक्टेयर तक है। ऐसे में इतनी भूमि पर चावल के उत्पादन के साथ भारत ने नंबर-1 की उपलब्धि हासिल की है।
भारत कैसे बना नंबर-1
पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे प्रमुख राज्यों में सिंचाई नेटवर्क के विस्तार और नए कृषि तकनीकों के उपयोग से भारत में चावल उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, अच्छी उपज देने वाली हाइब्रिड और बीमारी-रोधी चावल की किस्मों के उपयोग ने प्रति हेक्टेयर उत्पादन क्षमता को बेहतर किया है।
सरकार का मिला समर्थन
केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा धान की खरीद, एमएसपी में बढ़ोतरी और खाद-बीज पर दी जाने वाली सब्सिडी ने किसानों को चावल उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
ग्लोबल एक्सपोर्ट में 40 फीसदी की हिस्सेदारी
भारत अकेले दुनिया के कुल चावल निर्यात के लगभग 35% से 40% हिस्से की आपूर्ति करता है। इस कड़ी में हमारा देश प्रीमियम 'बासमती' चावल के जरिए मध्य-पूर्व और पश्चिमी देशों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है, वहीं 'गैर-बासमती' चावल के जरिए एशिया और अफ्रीका के गरीब व विकासशील देशों की खाद्य सुरक्षा में योगदान देता है।
