उत्तर प्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है। यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और बुद्ध धर्म के लोग रहते हैं, जो कि आपस में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हैं। इनमें एक धर्म ऐसा भी है, जिसे लेकर उत्तर प्रदेश को संबंधित धर्म का पालना भी कहा जाता है। कौन-सा है यह धर्म और क्या है इसके पीछे का कारण, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
यूपी को इस धर्म का पालना कहा जाता है
उत्तर प्रदेश को 'बौद्ध धर्म का पालना'यानि Cradle of Buddhism कहा जाता है। भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति बिहार के बोधगया में हुई थी, लेकिन बौद्ध धर्म का उदय, इसका शुरुआती विकास, संघ की स्थापना, मुख्य उपदेश और बुद्ध का महापरिनिर्वाण जैसी सभी महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं उत्तर प्रदेश में ही हुईं थीं।
उत्तर प्रदेश को बौद्ध धर्म का पालना क्यों कहते हैं
ज्ञान प्राप्त करने के बाद भगवान बुद्ध ने अपने धर्म का पहला उपदेश वाराणसी के पास सारनाथमें अपने पांच पुराने साथियों को दिया था। इस घटना को बौद्ध परंपरा में 'धम्मचक्रप्रवर्तन' कहा जाता है। यहीं से बौद्ध संघ की स्थापना हुई और बौद्ध धर्म एक संगठित आंदोलन के रूप में पूरे विश्व में फैलना शुरू हुआ था।
श्रावस्ती रहा सबसे पसंदीदा स्थल
उत्तर प्रदेश का श्रावस्ती भगवान बुद्ध का सबसे पसंदीदा स्थल रहा है। यहां भगवान बुद्ध ने अपने जीवन के 24 सालबिताए थे। उन्होंने अपने जीवन के सबसे अधिक उपदेश और नीतियां यहीं की जनता और अपने शिष्यों को दी थीं। यहीं प्रसिद्ध अनाथपिंडक का 'जेतवन महाविहार' स्थित था।
कुशीनगर में बौद्ध धर्म का अंतिम अध्याय
भगवान बुद्ध के जीवन का अंत और मोक्ष की प्राप्ति उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में हुई थी। बुद्ध ने 80 साल की उम्र में वैशाख पूर्णिमा के दिन कुशीनगर में 'महापरिनिर्वाण' प्राप्त किया था। यही वजह है कि कुशीनगर आज भी पूरी दुनिया के बौद्ध मतावलंबियों के लिए सबसे पवित्र अंतरराष्ट्रीय प्रार्थना और दर्शन स्थलों में से एक है।
बुद्ध के जीवन से जुड़े अन्य प्रमुख स्थल
उत्तर प्रदेश में ऐसे बहुत-से स्थल हैं, जहां बुद्ध ने अपने जीवन का लंबा समय बिताया। इनमें सिद्धार्थनगर वह जगह है, जो भगवान बुद्ध के बाल्यकाल का घर था, जहां उन्होंने सिद्धार्थ के रूप में अपना शुरुआती जीवन बिताया और राजसी सुखों का त्याग किया था। वहीं, बौद्ध मान्यताओं के अनुसार, बुद्ध स्वर्ग में अपनी माता को उपदेश देने के बाद इसी स्थान पर धरती पर अवतरित हुए थे।
वहीं, राजा उदयन के शासनकाल में बुद्ध ने कौशांबी की कई यात्राएं कीं और इसे बौद्ध अध्ययन का बड़ा केंद्र बनाया। इसके अलावा, रामग्राम व देवदहमें बुद्ध के ननिहाल और उनसे जुड़े कई अवशेष मौजूद हैं।
