लोकसभा में हाल ही में लोक परीक्षा(अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 को पेश किया गया है। इस बिल में पेपर लीक से जुड़े कड़े कानून बनाए गए हैं, जिनमें सजा और जुर्माना, दोनों ही बढ़ा दिए गए हैं। साथ ही, बिल में संपत्ति कुर्क और फास्ट ट्रैक कोर्ट की बात कही गई है। इस लेख में हम इस बिल के बारे में विस्तार से जानेंगे।
पुराने बिल को सख्त बनाता है नया बिल
यह बिल पुराने 'लोक परीक्षा अधिनियम, 2024' में बदलाव करके कानून को और भी सख्त बनाता है, जिससे भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक माफिया पर लगाम लगाई जा सके।
नए बिल में क्या-कया हैं मुख्य प्रावधान
नए बिल में सजा और जुर्माने के साथ सर्विस प्रोवाइडर कंपनी और पेपर लीक माफिया पर कड़ी सख्ती की बात की गई है, जो कि इस प्रकार हैः
सजा और जुर्माने में बढ़ोतरी (धारा 10 और 11)
नए बिल के तहत अपराध की गंभीरता को देखते हुए कानून में सजा और आर्थिक दंड को बढ़ा दिया गया है। अब सामान्य अपराध Section 10(1) के तहत, पेपर लीक या नकल में शामिल दोषियों के लिए जेल की सजा को 3-5 साल से बढ़ाकर 5 से 10 साल कर दिया गया है। साथ ही, जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तक किया गया है।
संगठित अपराध / पेपर लीक माफिया Section 11(1)
इसके तहत यदि कोई गिरोह पेपर लीक करता है, तो उसकी न्यूनतम सजा 5 साल से बढ़ाकर कम से कम 7 से 10 साल तक हो सकती है। साथ ही, जुर्माना राशि को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
सर्विस प्रोवाइडर/एजेंसी Section 10(2)
इसके तहत परीक्षा कराने वाली एजेंसी या कंपनी या फिर उनके निदेशकों को पेपर लीक से जुड़े पाए जाने पर अब 1 करोड़ के बजाय 5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगेगा। साथ ही, 3 से 10 साल तक की सजा भी हो सकती है।
स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट (धारा 12A और 12B)
अब पेपर लीक या पेपर में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होने पर इससे जुड़े मुकदमे के जल्दी निपटारे के लिए प्रत्येक राज्य में फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही गई है। इन अदालतों में केस आने पर 3 महीने में ट्रायल पूरा कर फैसला सुनाना होगा। साथ ही, कोर्ट बिना किसी विशेष वजह के सुनवाई में अगले दिन से ज्यादा की तारीख नहीं दे सकेंगे।
जांच के लिए समय-सीमा
नए संशोधन के तहत अब परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ी की जांच 2 महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
संपत्ति की जब्ती और स्पेशल टास्क फोर्स
पेपर से जुड़ी गड़बड़ी में दोषी पाए जाने वाले अपराधियों और संस्थाओं की संपत्ति कुर्क और जब्त करने का अधिकार भी इसमें जोड़ा गया है।
