उत्तराखंड भारत का 27वां राज्य है, जिसका गठन नवंबर, 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग कर किया गया था। यह राज्य अपने सुंदर प्राकृतिक नजारें और ऊंची-ऊंची चोटियों के लिए जाना जाता है। इस कड़ी में यहां आपने ‘पहाड़ों की रानी’ के बारे में सुना ही होगा, जो कि ‘मसूरी’ को कहा जाता है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि उत्तराखंड में एक ऐसा शहर भी है, जिसे ‘पहाड़ों का राजा’ भी कहा जाता है। कौन-सा है यह शहर, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
कौन-सा शहर है ‘पहाड़ों का राजा’
उत्तराखंड में 'पहाड़ों का राजा' यानि King of Hills के रूप में चक्रौता और रानीखेत को जाना जाता है। वहीं,मसूरी को 'पहाड़ों की रानी' यानि ‘Queen of Hills’ कहा जाता है। यदि जिले की बात करें, तो देहरादून के अंतर्गत आने वाला पर्वतीय क्षेत्र 'चक्रौता' और अल्मोड़ा जिले में स्थित 'रानीखेत' इस उपनाम के लिए जाने जाते हैं।
चक्रौता क्यों है 'पहाड़ों का राजा'
देहरादून जिले का चक्रौता अपनी शांत, अछूती और राजसी पहाड़ी सुंदरता के कारण लोगों के बीच में 'पहाड़ों का राजा' कहलाता है। मसूरी और नैनीताल जैसी व्यावसायिक जगहों की तुलना में चक्रौता बहुत शांत और प्राकृतिक रूप से संरक्षित जगह है। ब्रिटिश काल से ही यह एक प्रमुख छावनी क्षेत्र रहा है। यहां के ऊंचे देवदार और चीड़ के घने जंगल इसे एक शाही रूप देते हैं।
चक्रौता के मुख्य आकर्षण
चक्रौता के मुख्य आकर्षण मे टाइगर फॉल है, जो कि उत्तराखंड के सबसे ऊंचे झरनों में से एक है। वहीं, यहां देवबन और बुधेर गुफाएं भी प्रसिद्ध हैं।
रानीखेत है कुमाऊं की राजसी पहचान
अल्मोड़ा जिले में स्थित रानीखेत को भी कुमाऊं क्षेत्र में 'पहाड़ों का राजा' या 'रानी का खेत' कहा जाता है। लोकमान्यताओं के अनुसार, कत्युरी राजा सुधारदेव की पत्नी रानी पद्मिनी इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता से इतनी मंत्रमुग्ध हुईं कि उन्होंने इसी स्थान पर अपना निवास चुना, जिससे इसका नाम 'रानीखेत' पड़ा।
रानीखेत के मुख्य आकर्षण
यहां से नंदा देवी, त्रिशूल और पंचाचूली जैसी बर्फीली हिमालयी चोटियों का साफ नजारा दिखाई देता है। इसके अलावा, रानीखेत में भारतीय सेना की प्रसिद्ध 'कुमाऊं रेजीमेंट' का मुख्य केंद्र और संग्रहालय स्थल भी है।
