भारत के उत्तर में जब भी प्रमुख राज्यों की बात होती है, तो इसमें उत्तर प्रदेश का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। राज्य में कुल 75 जिले हैं, जो कि 18 मंडलों में आते हैं। ये सभी मंडल कुल चार संभागों का हिस्सा हैं, जिनमें पूर्वांचल, मध्यांचल, पश्चिमांचल और बुंदेलखंड शामिल है। प्रदेश के ये सभी जिले अपनी अलग-अलग विशेषताओं के लिए जाने जाते हैं। इस कड़ी में क्या आप जानते हैं कि यूपी में एक जिला ऐसा भी है, जिसे उसके मूल नाम के अलावा ‘विंध्य नगरी’ के नाम से भी जाना जाता है।
किस जिले को कहा जाता है ‘विंध्य नगरी’
उत्तर प्रदेश के दक्षिणी-पूर्वी हिस्से में गंगा नदी के तट पर स्थित मिर्जापुर जिले को ‘विंध्य नगरी’ के नाम से भी जाना जाता है। यह जिला अपनी धार्मिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं के कारण पूरे देश में एक विशेष पहचान रखता है।
विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की उपस्थिति
भौगोलिक हिसाब से मिर्जापुर जिला प्रसिद्ध विंध्याचल पर्वतमाला की तलहटी और गोद में बसा हुआ है। भारत के भूगोल और इतिहास में विंध्य पर्वत श्रेणी का महत्त्वपूर्ण स्थान है, जो उत्तर भारत और दक्षिण भारत को प्राकृतिक रूप से अलग करती है। विंध्य पहाड़ियों के मुख्य भाग में स्थित होने के कारण इस पूरे क्षेत्र को प्राकृतिक और पौराणिक रूप से 'विंध्य क्षेत्र' कहा जाता है, जिससे मिर्जापुर को विंध्य नगरी का नाम मिला।
मां विंध्यवासिनी मंदिर है प्रमुख
मिर्जापुर को विंध्य नगरी कहे जाने का सबसे बड़ा और प्रमुख कारण यहां स्थित प्रसिद्ध मां विंध्यवासिनी देवीका मंदिर है। हिंदू धर्मग्रंथों और पुराणों के अनुसार, विंध्याचल धाम महाशक्तिपीठों में गिना जाता है।
मिर्जापुर में सांस्कृतिक और प्राकृतिक संगम
विंध्य पहाड़ियों की प्राकृतिक हरी-भरी वादियों, झरनों और गंगा नदी के संगम के कारण यह क्षेत्र पुराने समय से ही ऋषियों, मुनियों और तपस्वियों की साधना स्थली रहा है। यहां का वातावरण धार्मिक ऊर्जा और आध्यात्मिक शांति से भरा हुआ है। इस वजह से धार्मिक रूप से मिर्जापुर का महत्त्व और बढ़ जाता है।
कालीन नगरी के लिए मशहूर
आपको बता दें कि मिर्जापुर शहर को कालीन उद्योग के लिए जाना जाता है। उत्तर प्रदेश की ‘एक जिला-एक उत्पाद योजना’ में यहां के कालीन उद्योग को लिस्टेड भी किया गया है। यही वजह है कि मिर्जापुर शहर को ‘कारपेट सिटी’ के रूप में भी जाना जाता है।
