भारतीय सेना में थल, वायु और जल सेना के अलग-अलग वर्दी होती है। इस कड़ी में सेना के अधिकारी अलग-अलग अवसरों पर अलग-अलग वर्दी पहनते हैं। इनमें मरून बैरट वर्दी का अहम भाग होता है। हालांकि, यह सभी अधिकारियों और जवानों को नहीं मिलती है। ऐसे में हम जानेंगे कि आखिर सेना में कौन-से अधिकारी और जवान मरून बैरट पहनते हैं और क्या है इसका पीछा का कारण, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
किससे संबंधित है मरून बैरट
भारतीय सेना और सशस्त्र बलों में मरून बैरटका संबंध सीधे पैराशूट और स्पेशल फोर्सेज से होता है। वैश्विक स्तर पर भी मरून बैरट हवाई हमले और स्पेशल ऑपरेशन्स के विशेष सैनिकों का प्रतीक मानी जाती है।
किन अधिकारियों और जवानों को मिलती है मरून बैरट
भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बलों में नीचे दिए गए अधिकारियों एवं जवानों को मरून बैरट पहनने की अनुमति होती है:
पैराशूट रेजिमेंट एवं पैरा स्पेशल फोर्सेज
पैराशूट रेजिमेंट की स्पेशल फोर्सेज यूनिट्स जैसे 1 Para SF, 9 Para SF व 10 Para SF आदि के सभी अधिकारियों और जवानों को मरून बैरट मिलती है। इसके साथ ही पैराशूट रेजिमेंट की सामान्य हवाई बटालियनों में सेवा देने वाले अधिकारियों को भी मैरून बैरट मिलती है।
50वीं पैराशूट ब्रिगेड
इस ब्रिगेड में तैनात सभी अधिकारी और सैनिक मरून बैरट पहनते हैं। इसमें केवल इन्फैंट्री ही नहीं, बल्कि आर्टिलरी, इंजीनियर्स, सिग्नल्स, और मेडिकलके वे अधिकारी भी शामिल होते हैं, जो पैराशूट ब्रिगेड का हिस्सा होते हैं या जिन्होंने पैरा-ट्रेनिंग पूरी की होती है।
राष्ट्रपति के अंगरक्षक
राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा में तैनात 'प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड' यूनिट के अधिकारी और जवान मरून बैरट पहनते हैं। यह भारत की सबसे पुरानी सैन्य इकाई है और इसके सभी सदस्य पैरा-प्रशिक्षित होते हैं।
पैरा-प्रशिक्षित सपोर्ट स्टाफ और डॉक्टर्स
जो सैन्य डॉक्टर पैराशूट ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी कर लेते हैं या पैरा इकाइयों में तैनात होते हैं, उन्हें मरून बैरट पहनने का अधिकार होता है।
-नौसेना के मरीन कमांडो यानि मार्कोज।
-भारतीय वायु सेना के गरुड़ स्पेशल फोर्सेज के अधिकारी।
-गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली पैरा-ट्रेन बल।
