Hindu New Year 2020: हिन्दू नववर्ष (नव सवंत्सर 2077) को भारत में किन-किन नामों से जाना जाता है
हिन्दू नववर्ष की शुरूआत चैत्र महीने से होती हैl हिन्दू कैलेंडर के अनुसार हम वर्ष 2077 में प्रवेश कर रहे हैं हिन्दू कैलेंडर को विक्रम संवत के नाम से जाना जाता है और इसका नाम उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के नाम पर रखा गया है जिन्होंने शकों पर विजय के उपलक्ष्य में इस कैलेंडर की शुरूआत की थीl
भारत में विभिन्न भाषा एवं धर्म को मानने लोग रहते हैं जिसके कारण यहाँ अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से नववर्ष को मनाया जाता हैl हिन्दू नववर्ष की शुरूआत चैत्र महीने से होती हैl हिन्दू कैलेंडर को विक्रम संवत के नाम से जाना जाता है और इसका नाम उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के नाम पर रखा गया है जिन्होंने शकों पर विजय के उपलक्ष्य में इस कैलेंडर की शुरूआत की थीl
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार साल में बारहों महीने के नाम इस प्रकार हैं- चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन हैl इस लेख में हम भारत के विभिन्न हिस्सों में हिन्दू नववर्ष को जिन नामों से जाना जाता है, उसका विवरण दे रहे हैंl
1. चैत्र नववर्ष/चैत्र प्रतिपदा/चैत्र नवरात्रि: मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं झारखण्ड
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चैत्र नवरात्रि की शुरूआत हिन्दू कैलेंडर के पहले महीने चैत्र में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होता हैl ब्रह्म पुराण के अनुसार चैत्र प्रतिपदा से ही ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। चैत्र नवरात्रि से ही हिन्दू नववर्ष के पंचांग की गणना प्रारंभ होती है। कुछ लोगों का मानना है कि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा अवतरित हुर्इ थी और मां दुर्गा के कहने पर ही ब्रह्माजी ने सृष्टि निर्माण का कार्य प्रारंभ किया था। यही कारण है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही हिन्दू नववर्ष शुरू होता है।
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ऐसी भी मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप में पहला अवतार लिया और पृथ्वी की स्थापना की थी। इसके अलावा भगवान विष्णु के अवतार भगवान श्रीराम का जन्म भी चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि को हुआ था, जिसे रामनवमी के नाम से मनाया जाता हैlचैत्र नवरात्रि में कलश स्थापित कर नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाया जाता है और नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।
नवरात्रि का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिषशास्त्र में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है क्योंकि चैत्र नवरात्रि से ही सूर्य की राशि में परिवर्तन होता है। भगवान सूर्य 12 राशियों में अपना भ्रमण पूरा करने के बाद फिर से अगले चक्र को पूरा करने के लिए पहली राशि अर्थात मेष राशि में प्रवेश करते हैंl
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2. उगादी: आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक

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युगाडी या उगादी नाम संस्कृत शब्द युग (आयु) और आदि (शुरुआत) से लिया गया है, जिसका अर्थ है “एक नई उम्र की शुरुआत”l इस त्योहार को चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता हैl इस दिन लोग अपने घरों और आस पास की अच्छे से सफाई करते हैं और अपने घरों के प्रवेश द्वार में आम के पत्ते लगाते हैं। लोग इस दिन अपने लिए और अपने परिवार जनों के लिए सुन्दर कपडे खरीदते हैं। इस दिन सभी लोग सवेरे से उठते हैं और तिल के तेल को अपने सिर और शरीर में लगाते हैं और उसके बाद वे मंदिर जाते हैं और प्रार्थना करते हैं। लोग इस दिन भगवान् को सुन्दर सुगन्धित चमेली के फूलों का हार चड़ाते हैं और उनकी पूजा आराधना करते हैं।
इस त्योहार के अवसर पर लोग बहुत ही स्वादिष्ट खाना और मिठाइयाँ बनाते हैं और अपने परिवार और आस पास के लोगों को बाँटते भी हैं। उगादी त्योहार पर बनने वाले व्यंजनों में “उगादी पचड़ी” और “पुलिओगुरे” प्रमुख हैंl तेलंगाना में इस त्योहार को 3 दिन तक लगातार मनाया जाता है।
कई जगहों में इस दिन भक्ति संगीत और कवि सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है और कई पारंपरिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक झांकियों का प्रदर्शन किया जाता हैl
3. गुड़ी पड़वा: महाराष्ट्र, गोवा और कोंकण क्षेत्र

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गुड़ी पड़वा के अवसर पर महाराष्ट्र, गोवा और कोंकण क्षेत्र के लोग इस दिन गुड़ी का पूजन कर इसे घर के द्वार पर लगाते हैं और घर के दरवाजों पर आम के पत्तों से बना बंदनवार सजाते हैंl ऐसा माना जाता है कि यह बंदनवार घर में सुख, समृद्धि और खुशियां लाता है।
गुड़ी पड़वा के दिन खास तौर से हिन्दू परिवारों में “पूरनपोली” नामक मीठा व्यंजन बनाने की परंपरा है, जिसे घी और शक्कर के साथ खाया जाता है। वहीं मराठी परिवारों में इस दिन खास तौर से “श्रीखंड” बनाया जाता है, और अन्य व्यंजनों व पूरी के साथ के साथ परोसा जाता है।
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गुड़ी पड़वा के दिन नीम की पत्ति यां खाने का भी विधान है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर नीम की कोपलें खाकर गुड़ खाया जाता है। इसे कड़वाहट को मिठास में बदलने का प्रतीक माना जाता है।
हिन्दू पंचांग का आरंभ भी गुड़ी पड़वा से ही होता है। कहा जाता है के महान गणितज्ञ- भास्कराचार्य द्वारा इसी दिन से सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन, मास और वर्ष की गणना कर पंचांग की रचना की गई थी।
गुड़ी पड़वा शब्द में गुड़ी का अर्थ होता है विजय पताका और पड़वा प्रतिपदा को कहा जाता है। गुड़ी पड़वा को लेकर यह मान्यता है, कि इस दिन भगवान राम ने दक्षिण के लोगों को बाली के अत्याचार और शासन से मुक्त किया था, जिसकी खुशी के रूप में हर घर में गुड़ी अर्थात विजय पताका फहराई गई थीl आज भी यह परंपरा महाराष्ट्र और कुछ अन्य स्थानों पर प्रचलित है, जहां हर घर में गुड़ी पड़वा के दिन गुड़ी फहराई जाती है।
मराठी भाषियों की एक मान्यता यह भी है कि मराठा साम्राज्य के अधिपति छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस दिन ही हिन्दू पदशाही का भगवा विजय ध्वज लगाकर हिन्दवी साम्राज्य की नींव रखी थीl
4. सजीबू नोंग्मा पनबा या चैरोबा: मणिपुर
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सजीबू नोंग्मा पनबा, जिसे “मीती चैरोबा” या “सजीबू चैरोबा” भी कहते हैं, मणिपुर के संजाम धर्म का पालन करने वाले लोगों का प्रसिद्ध त्योहार हैl सजीबू नोंग्मा पनबा मणिपुरी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ “सजीबू महीने का पहला दिन” हैl इस दिन सभी मणिपुरी लोग सुबह में उठ कर पूजा करते हैं। इस दिन महिलाएं नए चावल, सब्जियों और फूल और फलों से खाना पकाती हैं और उनको लेकर लाइनिंगथोउ सनामही और लेइमरेल इमा सिडबी को भोग चढाते हैं।
5. नवरेह: जम्मू-कश्मीर

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नवरेह शब्द संस्कृत शब्द "नववर्ष" से बना है। कश्मीर में नवरेह नव चंद्रवर्ष के रूप में मनाया जाता है। नवरेह उत्साह व रंगों का त्योहार है। कश्मीरी पंडित इसे बड़े उत्साह से मनाते हैं। इस त्योहार से एक दिन पूर्व कश्मीरी पंडित पवित्र विचर नाग के झरने की यात्रा करते हैं तथा इसमें पवित्र स्नानकर मलिनता का त्याग करते हैं। इसके पश्चात् प्रसाद ग्रहण किया जाता है। प्रसाद को 'व्ये' कहते हैं। इसमें विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियाँ डाली जाती हैं तथा घर में पिसे चावल की पिट्ठी भी सम्मिलित की जाती है। कश्मीर में नवरेह की सुबह लोग सर्वप्रथम चावल से भरे पात्र को देखते हैं। यह धन, उर्वरता तथा समृद्धशाली भविष्य का प्रतीक है।
पंडित परिवार का कुलगुरू, नया कश्मीरी पंचांग, जिसे “नेची-पत्री” कहते हैं, अपने यजमानों को प्रदान करते हैं। इसके अलावा एक अलंकृत पत्रावली, जिसे “क्रीच प्रच” कहते हैं और जिसमें देवी शारिका की मूर्ति बनी होती है, भी प्रदान की जाती है।
6. थापना: राजस्थान, मारवाड़ क्षेत्र

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थापना त्योहार राजस्थानी कैलेंडर "मारवाड़ी मिति" के अनुसार चैत्र शुद्ध की पहली तिथि को मनाया जाता हैl
7. चेती चाँद: सिंधी क्षेत्र

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सिन्धी लोग इस दिन को “चेती चाँद” के नाम से मनाते हैं। इस दिन को वे जल के देवता वरूण के जन्म दिवस के रूप में मनाते हैं। इसके अलावा इस दिन भगवान जुलेलाल और बेह्रानो साहिब की भी पूजा करते हैं।
चैत्र नवरात्रि पर आधारित सामान्य ज्ञान क्विज
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