भारत का वह सुल्तान, जिसे कहा जाता था ‘गुलामों का गुलाम’, कभी बदायूं का था सूबेदार

Last Updated: Sep 14, 2026, 16:29 IST

इतिहास में आपने अलग-अलग सुल्तानों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, इनमें एक सुल्तान ऐसा भी रहा है, जिसे ‘गुलामों का गुलाम’ भी कहा जाता है। कौन था यह सुल्तान, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें। 

गुलामों का गुलाम
गुलामों का गुलाम

इतिहास उठाकर देखें, तो हमें अलग-अलग सुल्तानों के नाम पढ़ने और सुनने को मिलते हैं। इस कड़ी में भारत में दिल्ली सल्तनत का एक सुल्तान ऐसा भी रहा है, जिसे ‘गुलामों का गुलाम’ भी कहा जाता था। इस सुल्तान को दिल्ली सल्तनत का वास्तविसक संस्थापक भी माना जाता है। साथ ही, यह  कभी उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले का सूबेदार भी हुआ करता था। कौन था यह गुलाम, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें। 

किसे कहा जाता था ‘गुलामों का गुलाम’

दिल्ली सल्तनत के सुल्तान शम्सुद्दीन इल्तुतमिश को इतिहास में 'गुलामों का गुलाम'कहा जाता है। वह 1211 ई. से 1236 ई. तक दिल्ली सल्तनत के सुल्तान रहे और उन्हें दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापकभी माना जाता है। 

क्यों कहा जाता था 'गुलामों का गुलाम'?

इल्तुतमिश को ‘गुलामों का गुलाम’ कहने के पीछे बहुत-से कारण थे। दरअसल, भारत में मुस्लिम सत्ता की नींव रखने वाला मोहम्मद गोरी एक शासक था। गोरी का सबसे भरोसेमंद और प्रमुख गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक था, जिसने 1206 ई. में दिल्ली सल्तनत और गुलाम वंश की स्थापना की थी।

वहीं, इल्तुतमिश, जो इल्बरी तुर्क जनजाति से संबंध रखता था, को कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली के बाजार से खरीदा था। ऐबक खुद गोरी का गुलाम था और इल्तुतमिश ऐबक का गुलाम था, इसीलिए इतिहासकारों ने इल्तुतमिश को ‘गुलामों का गुलाम’ कहा है।

गुलामी से कैसे बना सुल्तान 

इल्तुतमिश अपनी योग्यता, ईमानदारी और सैन्य कौशल के बल पर ऐबक का सबसे पसंदीदा सेनापति बना था। गद्दी पर बैठने से पहले वह बदायूंका सूबेदार था। 1205 ई. में खोखर जनजातियों के खिलाफ युद्ध में इल्तुतमिश की वीरता से प्रभावित होकर मोहम्मद गोरी ने कुतुबुद्दीन ऐबक को निर्देश दिया कि इल्तुतमिश को तुरंत गुलामी से मुक्त कर दिया जाए। 1210 ई. में ऐबक की मृत्यु के बाद उसके बेटे आरामशाह को गद्दी से उतारकर 1211 ई. में इल्तुतमिश को दिल्ली की गद्दी पर बैठाया गया।

इल्तुतमिश के प्रमुख ऐतिहासिक कार्य 

-कुतुबुद्दीन ऐबक ने जिस कुतुब मीनार की केवल पहली मंजिल बनवाई थी, उसकी बाकी मंजिलों का निर्माण कराकर इल्तुतमिश ने इसे पूरा कराया था। -शासन चलाने और विरोधियों को काबू करने के लिए इल्तुतमिश ने अपने 40 वफादार तुर्क गुलाम सरदारों का एक शक्तिशाली संगठन बनाया, जिसे 'चालीसा' कहा गया।

-इल्तुतमिश ने सैनिकों और अधिकारियों को नकद वेतन के बदले भूमि का राजस्व क्षेत्र देने की 'इक्ता प्रथा' शुरू की थी।

-इल्तुतमिश भारत में शुद्ध अरबी सिक्के चलाने वाला पहला तुर्क शासक था। उसने चांदी का 'टका'और तांबे का 'जीतल'जारी किया।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Sep 14, 2026, 16:26 IST

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