भारत कुल 9 देशों के साथ अपनी सीमा साझा करता है। इसमें स्थलीय रूप से यह 7 देश और जलीय रूप से 2 देशों के साथ सीमा साझा करता है। भारत और अलग-अलग देशों के बीच की सीमा को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इस कड़ी में क्या आप जानते हैं कि 'जीरो लाइन' भारत और किस देश के बीच की सीमा कहलाती है? यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
भारत और किस देश के बीच है 'जीरो लाइन'
भारत और बांग्लादेश के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा को 'जीरो लाइन' कहा जाता है। विशेष रूप से भारत के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा और बांग्लादेश के बीच की सीमा को 'जीरो Line' के रूप में जाना जाता है।
क्या है 'जीरो लाइन'?
अब हम 'जीरो लाइन' के बारे में जान लेते हैं। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय सीमा प्रबंधन में 'जीरो लाइन' वह काल्पनिक रेखा होती है, जिसके दोनों ओर 150 गजका क्षेत्र ‘बफर जोन’ माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय सीमा समझौतों के अनुसार, जीरो लाइन से 150 गज के दायरे में किसी भी देश द्वारा कोई भी स्थायी डिफेंसिव ढांचा, पक्की बाड़ या निर्माण कार्य करने की अनुमति नहीं होती है।
त्रिपुरा-बांग्लादेश सीमा
त्रिपुरा की राजधानी अगरततला का अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन और भारत-बांग्लादेश सीमा की अखौरा एकीकृत चेक पोस्ट बिल्कुल जीरो लाइन के पास स्थित है, जहां दोनों देशों की सीमाएं बहुत करीब आकर मिलती हैं।
भारत-बांग्लादेश सीमा के मेजर फैक्ट्स
भारत और बांग्लादेश के बीच 4,096.7 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। यह भारत की किसी भी पड़ोसी देश के साथ सबसे लंबी थल सीमा है। यह सीमा भारत के 5 राज्यों से होकर गुजरती है:
-पश्चिम बंगाल (2,217 किमी)
-त्रिपुरा (856 किमी)
-मेघालय (443 किमी)
-मिजोरम (180 किमी)
-असम (262 किमी)
रेडक्लिफ लाइन से जीरो लाइन तक
1947 में भारत के विभाजन के समय सर सिरिल रेडक्लिफ ने भारत और तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा खींची थी। भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों पुराने सीमा के विवाद को समाप्त करने के लिए 100वें संविधान संशोधन (2015) के तहत भूमि सीमा समझौतालागू किया गया, जिससे जीरो लाइन का सीमांकन हो गया।
