Bhadohi New Name: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 जुलाई को वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास जन्मस्थली से एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि भदोही जिले का नाम बदलकर फिर से 'संत रविदास नगर' (Sant Ravidas Nagar) किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस फैसले से जुड़ी सभी सरकारी औपचारिकताएं जल्द पूरी कर ली जाएंगी। यह घोषणा संत रविदास महाराज के 650वें जयंती वर्ष के अवसर पर शुरू हुए 'समरसता संकल्प अभियान' के शुभारंभ के दौरान की गई।
संत रविदास के सम्मान से जुड़ा है यह फैसला
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पहले की सरकारों ने जिले से संत रविदास का नाम हटा दिया था, लेकिन उनकी सरकार इसे फिर से सम्मान दिलाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा, ‘आज से भदोही फिर संत रविदास नगर के नाम से जाना जाएगा’
साथ ही मुख्यमंत्री ने लोगों से संत रविदास के समानता, सामाजिक समरसता और मानवता के संदेश को जीवन में अपनाने की भी अपील की।
32 साल में तीन बार बदला जिले का नाम
भदोही का नाम बदलने का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। 30 जून 1994 को वाराणसी से अलग होकर यह उत्तर प्रदेश का 65वां जिला बना था। 4 दिसंबर 1997 को तत्कालीन मायावती सरकार ने इसका नाम 'संत रविदास नगर' रखा। इसके बाद दिसंबर 2014 में अखिलेश यादव सरकार ने इसे फिर भदोही कर दिया था ।
अब करीब 12 साल बाद योगी सरकार ने एक बार फिर जिले को 'संत रविदास नगर' नाम देने का फैसला लिया है।
'कारपेट सिटी ऑफ इंडिया' के नाम से दुनिया में है मशहूर
भदोही सिर्फ नाम ही नहीं, अपनी पहचान के लिए भी खास रूप से जाना जाता है। क्षेत्रफल के लिहाज से यह उत्तर प्रदेश के सबसे छोटे जिलों में शामिल है, लेकिन हैंडनॉटेड कालीन उद्योग की वजह से पूरी दुनिया में मशहूर है। 'कारपेट सिटी ऑफ इंडिया' कहलाने वाला यह जिला भारत के कालीन निर्यात का बड़ा केंद्र है।
अंबेडकर और संत रविदास स्मारकों के लिए भी बड़ा ऐलान
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर और संत रविदास की प्रतिमाओं पर कैनोपी लगाने तथा उनके नाम पर बने पार्कों की चारदीवारी बनवाने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने करीब 650 वर्ष पहले सामाजिक समरसता, समानता और भाईचारे का जो संदेश दिया था, वही आज 'विकसित भारत' की सबसे मजबूत नींव बन सकता है।
