आखिर कैसे हुई बायोमेट्रिक्स तकनीक की खोज? आसान शब्दों में जानें यहां

बायोमेट्रिक्स का इस्तेमाल आज के समय में लगभग हर क्षेत्र में हो रहा है, ताकि सुरक्षा के खतरे को कम से कम किया जा सके। चाहे बैंक में जाना हो या मोबाइल फोन का लॉक ओपन करना हो, बायोमेट्रिक्स सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहा है। पर क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर बायोमेट्रिक्स तकनीक की खोज कैसे हुई और इसके पीछे की कहानी क्या है? आइए, इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं आसान भाषा में। 

Sep 22, 2026, 19:48 IST
Biometric
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“बायोमेट्रिक्स,” जिसे हम आमतौर पर फिंगरप्रिंट के रूप में भी जानते हैं, आज इस तकनीक का इस्तेमाल लगभग हर क्षेत्र में हो रहा है। चाहे वह बैंकिंग हो, मोबाइल का लॉक ओपन करना हो या डिजिटल पेमेंट्स करना हो—क्योंकि इसका सीधा संबंध हमारी सेफ्टी से है। बायोमेट्रिक्स हमेशा आपके शरीर के साथ होता है, इसलिए इसे कोई चोरी नहीं कर सकता। इसका कनेक्शन हमारी उंगलियों के निशान, चेहरे की बनावट या आंखों की पुतली से होता है। दुनिया में हर इंसान के फिंगरप्रिंट, चेहरे की बनावट और आंखों का आइरिस पैटर्न पूरी तरह अलग होता है। आइए अब जानते हैं कि आखिर बायोमेट्रिक्स तकनीक की खोज कैसे हुई और इसके पीछे की कहानी क्या है? 

हेनरी फॉल्ड्स ने बायोमेट्रिक्स खोज की  

बायोमेट्रिक्स अर्थात् फिंगरप्रिंट की खोज स्कॉटलैंड के चिकित्सक और वैज्ञानिक हेनरी फॉल्ड्स ने की। उनका जन्म 1 जून 1843 को स्कॉटलैंड के बीथ शहर में हुआ था। हेनरी का जन्म तो एक खुशहाल परिवार में हुआ था, लेकिन बाद में घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी। इसके चलते हेनरी को 13 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़कर शॉल बेचने का काम करना पड़ा। पर उनमें सीखने की ललक कभी कम नहीं हुई और इसी ललक के चलते ही वे बायोमेट्रिक्स तकनीक की खोज करने में कामयाब हो सकें।

हेनरी की पढ़ाई-लिखाई  

घर के हालात जब ठीक होने लगे, तो हेनरी ने फिर से अपनी पढ़ाई शुरु की। उन्होंने ग्लासगो यूनिवर्सिटी से गणित, तर्कशास्त्र और क्लासिक्स की शिक्षा ली। इसके बाद चिकित्सा विज्ञान में रुचि के चलते उन्होंने एंडरसन कॉलेज से डॉक्टर की डिग्री हासिल की। 

हेनरी ने जब खोला स्कॉटिश मिशन अस्पताल

डॉक्टर बनने के बाद हेनरी फॉल्ड्स चर्च ऑफ स्कॉटलैंड के मेडिकल मिशनरी बन गए और साल 1871 में उन्होंने भारत के दार्जिलिंग में स्थित गरीबों के अस्पताल में अपनी सेवाएं दी। साल 1871 में भारत के दार्जिलिंग में स्थित अपनी सेवाएं देने के बाद वे दो साल बाद जापान पहुंच गए और टोक्यों के सुकिजी इलाके में अपना पहला स्कॉटिश मिशन अस्पताल खोला।

आखिर बायोमेट्रिक्स की खोज कैसे हुई? 

1873 में जब हेनरी टोक्यों में काम कर रहे थे, तो वहां उन्होंने पुराने मिट्टी के बर्तन पर कुम्हार की उंगलियों के निशान देखें। बस यही से उन्हें फिंगरप्रिंट या बायोमेट्रिक्स का विचार आया। जब हेनरी ने इस पर गहरा रिसर्च किया, तो यह पाया कि हर इंसान के  फिंगरप्रिंट दूसरों से अलग होते हैं और जो कभी नहीं बदलते और इस तरह बायोमेट्रिक्स की खोज हुई। हेनरी फॉल्ड्स की इस तकनीक का इस्तेमाल पहली बार क्राइम की दुनिया में हुआ। जब फिंगरप्रिंट के जरिए किसी को न्याय मिला और असली अपराधी की पहचान हुई।

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Farhan Khan

Executive - Editorial

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