भारत में रक्षा बंधन का पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह सिर्फ भाई-बहन के प्यार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका जुड़ाव कृषि, धार्मिक अनुष्ठान, समुद्र और प्रकृति से भी है। इस पर्व को देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। साथ ही, इसे मनाने को लेकर अलग-अलग परंपराएं भी हैं। इस लेख में हम रक्षा बंधन के अलग-अलग नाम और इससे जुड़ी परंपराओं के बारे में जानेंगे।
महाराष्ट्र और गोवा में नराली पूर्णिमा
महाराष्ट्र और गोवा के तटीय इलाकों में खासकर कोली या मछुआरा समुदाय में इसे नराली पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन मछुआरे समुद्र देव की पूजा करते हैं और उन्हें नारियल अर्पित करते हैं। इसके बाद ही वे मानसून के ब्रेक के बाद फिर से समुद्र में मछली पकड़ने की शुरुआत करते हैं।
इन राज्यों में अवनि अवित्तम से है पहचान
भारत के तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में रक्षा बंधन को अवनि अवित्तम या 'उपाकर्म' कहा जाता है। यह मुख्य रूप से ब्राह्मण समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला पर्व है। इस दिन पुरुष पवित्र नदी या तालाब में स्नान करके अपना पुराना जनेऊ बदलते हैं और नया जनेऊ धारण करते हैं, जिसे 'उपाकर्म' कहा जाता है।
ओडिसा में होती है गम्हा पूर्णिमा
रक्षा बंधन को ओडिसा में गम्हा पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के साथ-साथ मवेशियों को भी समर्पित होता है। किसान इस दिन अपने मवेशियों की पूजा करते हैं, उन्हें सजाते हैं और राखियां बांधते हैं, क्योंकि वे कृषि का आधार माने जाते हैं।
गुजरात में पवित्रोपना से होती है पहचान
गुजरात में रक्षा बंधन को 'पवित्रोपना' के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में कजरी पूर्णिमा
रक्षा बंधन को मध्य भारत और बुंदेलखंड में 'कजरी पूर्णिमा' या 'कजरी नौमी' के रूप में भी मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से किसानों और महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। महिलाएं कजरी (जौ के पौधे) की पूजा करती हैं और अच्छी फसल व संतान की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं। इसके साथ ही भाई-बहन का राखी का त्योहार भी मनाया जाता है।
राजस्थान में लुंबा राखी परंपरा
राजस्थान में रक्षाबंधन को रक्षाबंधन ही कहा जाता है, लेकिन यहां 'लुंबा राखी' की परंपरा खास है। यहां बहनें केवल अपने भाई की कलाई पर ही नहीं, बल्कि अपनी भाभी की चूड़ी पर भी विशेष प्रकार की लटकी हुई राखी बांधती हैं, जिसे 'लुंबा' कहा जाता है।
उत्तराखंड में जनोपूंय से है पहचान
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में रक्षा बंधन को 'जनोपूंय' या रक्षाबंधन कहा जाता है। इस दिन लोग नदियों या कुंडों में जाकर संकल्प स्नान करते हैं और अपना जनेऊ बदलते हैं।
