भारत में 101वें संविधान संशोधन के तहत वस्तु एवं सेवा कर यानि Goods and Services Tax(GST) को लाया गया था। इसे 1 जुलाई, 2017 को लागू किया गया था। यह एक एक ऐसा इंटीग्रेटेड टैक्स सिस्टम है, जिसने देश की अर्थव्यवस्थाओं में क्रांति ला दी थी। वैश्विक स्तर पर और भारत के संदर्भ में जीएसटी का जनक अलग-अलग लोगों को माना जाता है। इस लेख में हम GST के जनक के बारे में विस्तार से जानेंगे।
दुनिया में GST का जनक कौन है
दुनिया में सबसे पहले जीएसटी को विकसित करने और इसे लागू करने का श्रेय फ्रांस के अर्थशास्त्री और संयुक्त मुख्य कर निदेशक मोरिस लॉरेको जाता है। 1950 के दशक की शुरुआत में मोरिस लॉरे ने देखा कि उस समय चल रहे टैक्स सिस्टम में टैक्स पर टैक्स की बड़ी समस्या थी, जिससे वस्तुओं की कीमतें बहुत अधिक बढ़ जाती थीं। इस वजह से टैक्स चोरी को बढ़ावा मिलता था।
किस देश में सबसे पहले लागू हुआ GST
लॉरे के सुझावों पर अमल करते हुए 10 अप्रैल 1954 को फ्रांस दुनिया का पहला ऐसा देश बना, जिसने आधिकारिक तौर पर VAT/GST सिस्टम को अपनाया। इस सिस्टम की सफलता को देखते हुए धीरे-धीरे दुनिया के 160 से अधिक देशों ने अपने यहां किसी न किसी रूप में जीएसटी या वैट मॉडल को लागू किया। इसलिए, मोरिस लॉरे को दुनिया के स्तर पर Father of GST कहा जाता है।
भारत में जीएसटी के जनक
अब हम भारत में जीएसटी के जनक के बारे में जान लेते हैं। भारत के संदर्भ में जीएसटी की नींव रखने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को दिया जाता है। साल 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने सबसे पहले 'एक राष्ट्र, एक कर' (One Nation, One Tax) की अवधारणा के तहत भारत में एक इंटीग्रेटेड इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम का विचार रखा था। वाजपेयी ने पश्चिम बंगाल के तत्कालीन वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता की अध्यक्षता में एक अधिकार प्राप्त समिति का गठन किया। इस समिति को भारत की विविधता और फेडरल ढांचे के हिसाब से जीएसटी मॉडल का ढांचा तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया था।
2017 में लागू हो गया GST
वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में यह कानून पूरी तरह पारित नहीं हो सका था, लेकिन उनके द्वारा रखी गई मजबूत नींव पर ही आगे चलकर इस पर काम हुआ। कई सालों के राजनीतिक विचार-विमर्श के बाद 1 जुलाई 2017 को भारत में औपचारिक रूप से जीएसटी लागू किया गया। यही वजह है कि अटल बिहारी वाजपेयी को भारत में GST का जनक माना जाता है।
