उत्तर प्रदेश जितना अपना समृद्ध इतिहास के लिए जाना जाता है, उतना ही यह अपनी जैव विविधता के लिए भी प्रसिद्ध है। इस कड़ी में यहां कई नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व बने हुए हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि यूपी का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व कौन-सा है, जहां घने जंगल और जंगल के सबसे खतरनाक शिकारी यानि कि टाइगर के लिए जाना जाता है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
यूपी का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व
उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व दुधवा टाइगर रिजर्व है। यह नेपाल सीमा से सटे तराई क्षेत्र में लखीमपुर खीरी और बहराइच जिलों में फैला हुआ है। दुधवा को लेकर खास बात यह है कि यह केवल एक जंगल नहीं, बल्कि जैव विविधता का एक बड़ा हब है, जो लगभग 2,200 वर्ग किलोमीटर से अधिक के कुल क्षेत्रफल में फैला हुआ है।
तीन वन्यजीव क्षेत्रों से मिलकर बना है दुधवा रिजर्व
दुधवा टाइगर रिजर्व मुख्य रूप से तीन प्रमुख वन्यजीव क्षेत्रों से मिलकर बना है, जो कि इस प्रकार हैंः
-दुधवा नेशनल पार्क : इसका मुख्य कोर क्षेत्र लगभग 490 वर्ग किमी है।
-कतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी: भारत-नेपाल सीमा पर बहराइच जिले में स्थित एक संवेदनशील और हरा-भरा क्षेत्र है।
-किशनपुर वाइल्डलाइफ सेंचुरी: यह सेंचुरी अपनी खुली घासभूमियों और पानी के तालाबों के लिए प्रसिद्ध है।
इन तीनों क्षेत्रों और उनके बफर जोनों को मिलाकर वर्ष 1987-88 में दुधवा टाइगर रिजर्व की स्थापना की गई थी।
दुधवा टाइगर रिजर्व का इकोसिस्टम
दुधवा टाइगर रिजर्व हिमालय की तलहटी में बसा हुआ है। यहां साल के घने जंगल हैं, जहां ऊंचे-ऊंचे पेड़ जंगल को घना बनाते हैं। वहीं, दुधवा टाइगर रिजर्व में तराई की लंबी घास हैं। इस टाइगर रिजर्व में शारदा, घाघरा और सुहेरी नदियां पानी का प्रमुख स्रोत हैं, जिससे यहां की जमीन दलदली और यहां नेचुरल झीलें बनती हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व की जैव विविधता
दुधवा टाइगर रिजर्व न केवल रॉयल बंगाल टाइगर का घर है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश का एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां आप बाघ और भारतीय एक-सींग वाले गैंडे, दोनों को एक साथ देख सकते हैं।
जंगल सफारी के लिए जाना जाता है दुधवा
दुधवा टाइगर रिजर्व अपने यहां की जीप और हाथी की सफारी के लिए जाना जाता है। यहां पर्यटक प्राकृतिक वातावरण में टाइगर, हाथी और विभिन्न प्रकार के पक्षियों को करीब से देख सकते हैं। इसके लिए आप यूपी वन विभाग की वेबसाइट पर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
