पुलिस यूनिफॉर्म में पुलिसकर्मी की पहचान के लिए नेम प्लेट लगी होती है, जिससे संबंधिक व्यक्ति की पहचान की जा सकती है। इसमें पुलिसकर्मी का नाम लिखा होता है। हालांकि, पुलिसकर्मी की असली पहचान उसका नाम नहीं, बल्कि बेल्ट नंबर होता है, जिसे हम बकल नंबर के नाम से भी जानते हैं। यह वर्दी की पहचान का एक सामान्य नंबर नहीं होता, बल्कि यह पुलिस विभाग के प्रशासनिक, अनुशासनात्मक और परिचालन सिस्टम की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी होता है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
सिर्फ इन कर्मचारियों को मिलता है बेल्ट नंबर
पुलिस में Constable से लेकर ASI तक के कर्मचारियों को बेल्ट नंबर दिया जाता है। दरअसल, यह नाम की जगह एक डिजिटल पहचान होती है। क्योंकि, एक ही पुलिस जिले या बटालियन में एक ही नाम के कई पुलिसकर्मी हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में केवल नाम से पहचान करना भ्रम पैदा कर सकता है। इस वजह से बेल्ट नंबर प्रत्येक कर्मचारी को दिया गया एक यूनिक कोड होता है।
कर्मचारी की होती है स्पष्ट पहचान
पुलिस की बेल्ट या वर्दी के बैच पर लिखा यह नंबर बहुत ही स्पष्ट होता है, जिससे किसी घटना, दंगे या भीड़ के दौरान आम जनता या सीनियर अधिकारी दूर से ही कर्मचारी की पहचान कर सकते हैं।
जनता के प्रति होती है जवाबदेही
यदि कोई पुलिसकर्मी ऑन ड्यूटी किसी नागरिक से दुर्व्यवहार करता है या अपने अधिकारों का दुरुपयोग करता है, तो आम नागरिक उसका नाम जाने बिना केवल बेल्ट नंबर नोट करके सीनियर अधिकारियों या अदालत में शिकायत दर्ज करा सकता है।
ड्यूटी और रिकॉर्ड प्रबंधन में उपयोगी
आपको बता दें कि पुलिस थानों में सुबह के समय 'रोल कॉल' या ड्यूटी रोस्टर के समय नाम के स्थान पर बेल्ट नंबर का उपयोग किया जाता है। वहीं, जब किसी पुलिसकर्मी को मालखाने से रायफल, पिस्टल या अन्य उपकरण जारी किए जाते हैं, तो रजिस्टर में उसके नाम के साथ बेल्ट नंबर ही दर्ज होता है, ताकि इमरजेंसी में सही जवाबदेही तय हो।
कैसे लिखा जाता है बेल्ट नंबर
बेल्ट नंबर में आमतौर पर दो हिस्से होते हैं, जो उस कर्मचारी का पूरा विवरण देते हैं:
उदाहरण- 1234/LKO
इसमें 1234 जिला या बटालियन का नंबर होता है, जबकि अंग्रेजी के ये अक्षर जिला या फिर यूनिट को दर्शाता है। जैसे यहां LKO का मतलब लखनऊ होता है।
ध्यान देने वाली बातें
-यदि किसी पुलिसकर्मी का ट्रांसफर हो जाता है, तो उसका बेल्ट नंबर भी बदल जाता है। पुलिसकर्मी को नया बेल्ट नंबर दिया जाता है।
-यदि किसी पुलिसकर्मी को प्रमोट कर सब-इंस्पेक्टर बना दिया जाता है, तो उसका बेल्ट नंबर खत्म हो जाता है।
