इन दिनों वंदे मातरम कानून को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। संसद के दोनों सदनों में वंदे मातरम विधेयक पारित हो चुका है। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना बाकी है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा, जिसे पूरे भारत में लागू किया जाएगा। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति वंदे मातरम का अपमान करता है, तो उसे ऐसा करना भारी पड़ सकता है। क्योंकि, विधेयक में सजा का प्रावधान किया गया है। क्या है वंदे मातरम कानून, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
अभी क्या है कानून
वर्तमान में 1971 में बने राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम के तहत राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान का अपमान करना ही दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल है। कानून की धारा 3 के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रगान गाने से रोकता है या इसे गा रही भीड़ में जानबूझकर बाधा डालता है, तो उसे 3 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
अब वंदे मातरम भी इस कानून में होगा शामिल
संसद में पारित राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण संशोधन विधेयक 2026 के तहत अब वंदे मातरम भी इसमें शामिल कर लिया गया है। ऐसे में यदि अब कोई व्यक्ति जानबूझकर वंदे मातरम का अपमान करता है या इसके गायन में बाधा डालता है, तो उसे राष्ट्रगान के अपमान के दंडनीय अपराध की तरह ही सजा भुगतनी होगी। यह सजा 3 सील की कैद और जुर्माना या फिर दोनों है।
1937 में मुस्लिम लीग ने जताई थी आपत्ति
साल 1937 में वंदे मातरम को लेकर मुस्लिम लीग द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई थी। लीग का तर्क था कि वंदे मातरम के कुछ हिस्सों में देवी स्वरूप मातृभूमि और कुछ धार्मिक पहलू भी जुड़े हुए हैं, जिन्हें गाने में दूसरे धर्म के लोग असहज महसूस कर सकते हैं। इसे देखते हुए कांग्रेस की ओर से आजादी के आंदोलन में गीत के पहले दो अंतरों को ही आधिकारिक तौर पर अपनाया गया था। वहीं, एक बड़ा वर्ग इसे मातृभूमि के प्रति सम्मान और देशभक्ति का प्रतीक मानता है।
अभी राष्ट्रपति से मंजूरी मिलना है बाकी
संसद के दोनों सदनों में विधेयक पारित होने के बाद अब इसे राष्ट्रपति से मंजूरी मिलना बाकी है। ऐसे में राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा, जिसके बाद यदि कोई व्यक्ति वंदे मातरम का अपमान करता है, तो उसे 3 साल की सजा या जुर्माना यो फिर दोनों भुगतना पड़ सकता है।
