हर साल 20 अगस्त को सद्भावना दिवस का आयोजन किया जाता है। यह दिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को समर्पित है, जिनकी इस दिन जयंती होती है। राजीव गांधी देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री रहे हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल में देश में कई बड़े बदलाव किये थे। इस कड़ी में देश में वोटिंग की उम्र घटाना भी एक बड़ा पहलू रहा है। इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर भारत में वोटिंग की उम्र 21 से घटाकर 18 क्यों की गई थी?
किस वर्ष घटी थी वोटिंग की उम्र
भारत में वोट देने की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने के पीछे का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदार बनाना और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सीधे तौर पर शामिल करना था। यह ऐतिहासिक बदलाव 61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 द्वारा किया गया था, जो 28 मार्च 1989 को लागू हुआ था। उस समय भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे।
क्यों घटाई गई थी वोटिंग की उम्र
भारत में 1980 के दशक आते-आते साक्षरता और सूचना के साधन बढ़ गए थे। उस समय यह माना गया कि 18 वर्ष की आयु के युवा राजनीतिक रूप से जागरूक होते हैं, जो कि अपना सही प्रतिनिधि चुन सकते हैं। वहीं, 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर नागरिक को कई कानूनी अधिकार मिल जाते थे,जैसे शादी, नौकरी व वयस्कता के अन्य अधिकार।
भारत में पहले से ही मौजूद करोड़ों युवाओं को यह लाभ मिलने से राजनीतिक रूप से भारत और मजबूत हुआ था, क्योंकि एक बड़ा वर्ग भारत के लोकतंत्र में शामिल हो गया था।
20 अगस्त को क्यों मनाया जाता है सद्भावना दिवस
20 अगस्त को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती होती है, जिसके उपलक्ष्य में सद्भावना दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य देश में राष्ट्रीय एकता, शांति, सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की भावना को बढ़ाना है।
कब से कब तक रहा राजीव गांधी का कार्यकाल
राजीव गांधी देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री रहे हैं। उनका कार्यकाल 31 अक्टूबर, 1984 से 2 दिसंबर 1989 तक रहा था। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद प्रधानमंत्री पद की कुर्सी संभाली थी। राजीव गांधी ने कुल 5 वर्षों तक पीएम के तौर पर अपनी सेवाएं दी थीं।
