भारतीय रेलवे में ट्रेनों की स्पीड को लेकर महत्त्वपूर्ण फैसला आ गया है। अब रेलवे के लोको पायलट अपने अनुभव और अनुमान के आधार पर ट्रेनों की रफ्तार नियंत्रित नहीं कर पाएंगे, बल्कि अब ट्रेनों की रफ्तार कवच से नियंत्रित होगी। रेलवे द्वारा यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने, मानवीय भूल से बचने व इससे होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने और ट्रेनों का समय सुधारने के लिए लिया गया है। इसके लिए चालकों को विशेष ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
किस परेशानी से जूझ रहा था रेलवे
वर्तमान में ट्रेनों संचालन लोको पायलट के अनुभव के आधार पर किया जाता है। लोको पायलट सिग्नल व अन्य परिस्थितियों को देखते हुए ट्रेन की रफ्तार कंट्रोल करते हैं। जिन ट्रेनों में कवच सिस्टम लगा हुआ है, उनमें कई बार कवच द्वारा सुझाई जा रही है ट्रेन स्पीड को भी चालक अनदेख कर देते हैं। इस वजह से कई बार ट्रेनों में इमेरजेंसी ब्रेक, तकनीकी खराबी और ट्रिपिंग की समस्या आ रही थी, जिससे ट्रेनें समय से अपने गंतव्यों पर नहीं पहुंच पा रही है।
बैठक में क्या हुआ फैसला
हाल ही में रेलवे बोर्ड की बैठक में कवच के हिसाब से ट्रेनों की स्पीड तय करने का फैसला लिया गया है। इस संबंध में सभी जोनल रेलवे बोर्ड को भी निर्देश दिए गए हैं। बैठक में यह फैसला लिया गया है कि अब कवच के यनिवर्सल पैरामीटर्स का अनुपालन करना होगा। मौजूदा समय में 1400 से अधिक लोकोमोटिव में कवच लग चुका है, जबकि इसका लक्ष्य 10,000 लोकोमोटिव का है।
क्या होता है कवच
अब हम कवच सिस्टम के बारे में जान लेते हैं। आपको बता दें कि रेलवे में दुर्घटनाओं का लेवल जीरो करने के लिए कवच सिस्टम बनाया गया है। इसके तहत यदि दो ट्रेनें एक ही ट्रैक पर आमने-सामने आ जाती हैं या लाल सिग्नल क्रॉस हो जाता है, तो यह अपने आप ब्रेक लगा देता है। वहीं, यदि अधिक कोहरे या अधिक बारिश की वजह से सिग्नल नहीं दिखता है, तो यह स्क्रीन पर रियल-टाइम स्पीड दिखाता है और रेलवे क्रॉसिंग्स पर हॉर्न बजाने का इंडिकेटर भी देता है। इससे लोको-पायलट किसी भी मौसम में ट्रेन को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचा सकते हैं।
